मिनर्वा थिएटर को चौथी बार बेचने की कोशिश, शोले फिल्म यहां पांच साल चली थी


महाराष्ट्र का गौरव कहे जाने वाले मिनर्वा थिएटर को एक बार फिर बेचने की कोशिश की जा रही है। IDBI बैंक ने इसे बेचने के लिए टेंडर जारी किया है। टेंडर में आवेदन भेजने की अंतिम तारीख 25 जनवरी है। इसकी रिजर्व प्राइस 57 करोड़ रुपए रखी गई है। इससे पहले भी तीन बार इसे बेचने की कोशिश की जा चुकी है।
IDBI ने 40 करोड़ का लोन दिया था, ब्याज समेत 85 करोड़ हुआ
यह थिएटर 15,975 वर्ग फुट में फैला है। 2006 में ओसियन ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन नेविल तुली ने जब इसे खरीदा था, तब आईडीबीआई ने इस पर 40 करोड़ रुपए का लोन दिया था। ब्याज समेत यह लोन बढ़कर 2013 में 84.8 करोड़ रुपए हो गया।

जगह की मार्केट वैल्यू 90 करोड़ रुपए है

यह मिनर्वा थिएटर के प्लॉट की ताजा तस्वीर है। थिएटर की बिल्डिंग गिराई जा चुकी है।

इस प्लॉट की बाजार वैल्यू 80-90 करोड़ रुपए बताई जा रही है। पहली बार इसे 70 करोड़ रुपए में बेचने की कोशिश की गई थी, लेकिन किसी ने इसे नहीं खरीदा। इसे एक बार फिर 2013 में 61 करोड़ रुपए में बेचने की कोशिश की गई थी, लेकिन तब भी किसी ने इसे खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। अब इसकी रिजर्व प्राइस यानी कम से कम कीमत 57 करोड़ रुपए रखी गई है।

इस थिएटर में शोले फिल्म पांच साल चली थी

दक्षिण मुंबई के बीचों-बीच लेमिंग्टन रोड पर मिनर्वा थिएटर फिल्म जगत के लिए आइकॉनिक माना जाता रहा है। भारत की सबसे कामयाब फिल्म मानी जाने वाली शोले इस थिएटर में लगातार 5 साल चली थी। फिल्म 1975 में रिलीज हुई थी और यहां 1980 तक चली थी।

भारत का पहला 70 MM प्रिंट भी यहीं दिखाया गया था

अमिताभ बच्चन की फिल्म दीवार ने मिनर्वा थिएटर में सिल्वर जुबली मनाई थी।

अमिताभ बच्चन की फिल्म दीवार ने भी यहां सिल्वर जुबली मनाई थी। भारतीय फिल्म इंडस्ट्री का पहला 70 MM प्रिंट भी इसी थिएटर में दिखाया गया था। यह प्रिंट शोले के समय ही आया था। उस समय शोले तीन शो में चलती थी और टिकट की कीमत 3.50 रुपए से 5.50 रुपए हुआ करती थी।

कस्टम में अटक गया था शोले का 70 MM प्रिंट
हाल में अमिताभ बच्चन ने लिखा था, ’15 अगस्त 1975 को मिनर्वा हॉल में शोले का प्रीमियर था। मां, बाबूजी, जया बच्चन और मैं था। जया खूबसूरत लग रही थीं। प्रीमियर पर 35 एमएम का प्रिंट मौजूद था। पर इंतजार था भारतीय सिनेमा इतिहास में पहली बार 70 एमएम स्टीरियो प्रिंट देखने का। वह प्रिंट इंग्लैंड से आ रहा था और कस्टम में अटक गया था। जब तक ये आता, तब तक प्रीमियर खत्म हो चुका था और लोग जा चुके थे। केवल रमेश (सिप्पी) जी और कुछ लोग रह गए थे। मिनर्वा में हमने पहली बार 70 एमएम का प्रिंट देखा। मैने हॉल के फर्श पर बैठ कर फिल्म देखी। यह रात 3 बजे खत्म हुई थी।’

एफसी मेहरा ने बनवाया था, मुंबई का सबसे बड़ा थिएटर था

मिनर्वा थिएटर​​ 1960 के दशक में बना था। इसमें एक्टर शम्मी कपूर की भी हिस्सेदारी थी।

फिल्म निर्माता एफसी मेहरा ने 1960 के दशक में यह थिएटर बनवाया था। एक्टर शम्मी कपूर की भी इसमें हिस्सेदारी थी। 1970 में इसमें कुछ बदलाव किए गए। 1501 सीटों वाला मिनर्वा मुंबई का सबसे बड़ा थिएटर था। एफसी मेहरा के बेटे उमेश मेहरा कहते थे कि आप तब तक स्टार नहीं बन सकते, जब तक आपकी फिल्म मिनर्वा में नहीं लगती है।

मेहरा परिवार ने 2006 में इसे नेविल तुली को बेचा
थिएटर में सबसे पहले 1971 में लाल पत्थर फिल्म दिखाई गई थी। यह मेहरा के अपने प्रोडक्शन ईगल फिल्म्स की मूवी थी। दिल्ली का प्लाजा थिएटर भी मेहरा ने ही बनवाया था। 2006 में ओसियन ग्रुप ऑफ कंपनीज के फाउंडर और चेयरमैन नेविल तुली ने मिनर्वा को खरीदा। वे यहां ऑर्ट कांप्लेक्स बनाना चाहते थे, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया।

भाइयों के बीच विवाद के कारण हालत खराब हुई
वरिष्ठ पत्रकार मोहन केसवानी ने बताया, मिनर्वा शोले के लिए ज्यादा जानी जाती है। मिनर्वा और मराठा मंदिर में बड़ी फिल्मों की स्क्रीनिंग के लिए हमेशा कॉम्पिटीशन रहता था। बड़े प्रोड्यूसर चाहते थे कि उनकी फिल्म इन दोनों में से किसी एक थिएटर में लगे। एफसी मेहरा और और उनके भाइयों के बीच प्रॉपर्टी विवाद की वजह से मिनर्वा की हालत खराब हो गई थी।

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Mumbai’s Iconic Old Cinema Theatre Minerva Sell Up News

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