2 जनवरी को पूरे देश में वैक्सीन का ड्राई रन होगा, अभी चार राज्यों में तैयारियां परखी गई थीं


2 जनवरी को पूरे देश में कोरोना वैक्सीन का ड्राई रन (ट्रायल) किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को हाईलेवल मीटिंग में ये फैसला लिया। बीते 28 और 29 दिसंबर को चार राज्यों में यह ट्रायल किया गया था। इसके तहत पंजाब, असम, आंध्र प्रदेश और गुजरात के दो-दो जिलों में वैक्सीनेशन के लिए मशीनरी की तैयारी को परखा गया था।

यूनियन हेल्थ सेक्रेटरी राजेश भूषण की अध्यक्षता में वैक्सीनेशन की तैयारियों की समीक्षा के लिए यह मीटिंग की गई थी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई बैठक में सेक्रेटरी (हेल्थ), नेशनल हेल्थ मिशन के MD और राज्यों / केंद्र शासित प्रदेशों के हेल्थ एडमिनिस्ट्रेटर्स शामिल हुए।

मीटिंग के बाद सरकार ने बताया कि सभी राज्यों और केंद्र प्रशासित राज्यों में ड्राई रन किया जाएगा। ट्रायल के लिए सभी राजधानियों में तीन पॉइंट तय किए जाएंगे। कुछ राज्यों के दूरदराज वाले जिलों को भी इसमें शामिल किया जाएगा, जहां तक वैक्सीन पहुंचाना मुश्किल हो सकता है। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से कहा है कि वे इस ट्रायल के लिए पर्याप्त इंतजाम करें।

ड्राई रन क्या है?

अब तक सरकार सिर्फ बच्चों और गर्भवती महिलाओं को ही वैक्सीनेट करती रही है। इसके लिए भी अलग-अलग राज्यों में हफ्ते का एक दिन तय होता है। यह पहला मौका है जब देश में वयस्क आबादी को भी वैक्सीनेट किया जाएगा। इस वजह से वैक्सीनेशन ड्राइव के लिए सरकारी मशीनरी की तैयारी देखने के लिए केंद्र सरकार ड्राई रन करा रही है।

इसमें राज्यों में कोल्ड चेन से वैक्सीनेशन साइट्स तक वैक्सीन लाने-ले जाने की प्रक्रिया परखी जाएगी। इसी तरह वैक्सीनेशन साइट्स पर किस तरह की दिक्कतें आ सकती है, यह भी पता लगाने की कोशिश होगी।

ऐसे परखी जाएगी पूरी प्रोसेस
ड्राई रन में कोविन (Co-WIN) पर जरूरी डेटा एंट्री होगी। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर वैक्सीन डिलीवरी, टेस्टिंग की रिसीप्ट और आवंटन, टीम मेंबर्स की नियुक्ति, वैक्सीनेशन साइट्स पर मॉक ड्रिल की निगरानी होगी।

कोविड-19 वैक्सीन के लिए कोल्ड स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन अरेंजमेंट्स की रियल-टाइम ट्रैकिंग इसमें शामिल है। वैक्सीनेशन साइट्स पर भीड़ के प्रबंधन के साथ ही फिजिकल डिस्टेंसिंग को भी देखा जा रहा है।

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हर राजधानी में तीन पॉइंट पर ड्राई रन किया जाएगा। कुछ दूरदराज के जिले भी इसमें शामिल होंगे, जहां पहुंचना मुश्किल होता है। इस कवायद के जरिए सरकार अपनी मशीनरी की तैयारियां परखना चाहती है।

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