कम से कम एक साल तक कोरोना से सेफ रखेगी कोवैक्सीन, फेज-2 ट्रायल्स के नतीजे जारी


कोवैक्सिन के फेज-2 क्लीनिकल ट्रायल्स के नतीजे आ गए हैं। यह स्वदेशी वैक्सीन है, जिसे भारत बायोटेक बना रही है। नए नतीजों के जरिए कंपनी ने यह दावा किया है कि कोवैक्सिन आपको कम से कम 12 महीने तक कोरोना से सेफ रख सकती है। वैक्सीन सभी उम्र के लोगों और महिला-पुरुषों में बराबरी से असरदार साबित हुई है।

कोवैक्सिन के फेज-2 के नतीजों को 7 पॉइंट में इस तरह समझिए

  • भारत बायोटेक की कोवैक्सिन के ट्रायल्स 380 सेहतमंद बच्चों और वयस्कों पर किए गए। 3 माइक्रोग्राम और 6 माइक्रोग्राम के दो फॉर्मूले तय किए गए। दो ग्रुप्स बनाए गए। उन्हें दो डोज चार हफ्तों के अंतर से लगाए गए।
  • फेज-2 ट्रायल में कोवैक्सिन ने हाई लेवल एंटीबॉडी प्रोड्यूस की। दूसरे वैक्सीनेशन के 3 महीने बाद भी सभी वॉलंटियर्स में एंटीबॉडी की संख्या बढ़ी हुई दिखी। इन नतीजों के आधार पर कंपनी का दावा है कि कोवैक्सिन की वजह से शरीर में बनी एंटीबॉडी 6 से 12 महीने तक कायम रहती है।
  • एंटीबॉडी यानी शरीर में मौजूद वह प्रोटीन, जो वायरस, बैक्टीरिया, फंगी और पैरासाइट्स के हमले को बेअसर कर देता है।
  • फेज-1 के मुकाबले फेज-2 स्टडी में न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडी की संख्या ज्यादा पाई गई है। सबसे अच्छी बात यह है कि इस वैक्सीन को लगाने के बाद जो मामूली साइड-इफेक्ट दिखे, वह भी 24 घंटे के अंदर ठीक हो गए। कोई भी गंभीर किस्म का साइड-इफेक्ट नहीं दिखा।
  • न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडी यानी वह एंटीबॉडी, जो किसी इंफेक्शन या वैक्सीनेशन के बाद डेवलप होती है और आगे होने वाले इंफेक्शन को ब्लॉक कर देती है।
  • फेज-2 नतीजे यह भी बता रहे हैं कि इस वैक्सीन से लंबे वक्त तक शरीर में बेहतर एंटीबॉडी डेवलप होती है और T-सेल मेमोरी रिस्पॉन्स नजर आता है।
  • T-सेल मेमोरी यानी वो सेल्स, जो किसी इंफेक्शन के खत्म होने के बाद डेवलप होती है और जैसे ही वह इंफेक्शन दोबारा नजर आता है, ये तुरंत उससे लड़ने के लिए रैपिड रिस्पॉन्स देती हैं।

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कोवैक्सिन के फेज-2 के नतीजे, जो कंपनी ने जारी किए।

कोवैक्सिन के अभी फेज-3 ट्रायल चल रहे हैं
भारत बायोटेक की इस वैक्सीन के अभी देश में फेज-3 के ट्रायल्स चल रहे हैं। इसी बीच, फेज-2 के ट्रायल्स के नतीजे आए हैं। कंपनी पहले ही वैक्सीन के लिए ड्रग रेगुलेटर से इमरजेंसी अप्रूवल भी मांग चुकी है।

इमरजेंसी अप्रूवल में देरी
भारत बायोटेक ने दिसंबर के पहले हफ्ते में ही कोवैक्सिन के लिए इमरजेंसी अप्रूवल मांगा था। इस पर ड्रग रेगुलेटर की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी की एक बैठक भी हो चुकी है। कमेटी ने भारत बायोटेक से कहा है कि वह ट्रायल से जुड़ा एडिशनल डेटा मुहैया कराए कि वैक्सीन की सेफ्टी और एफिकेसी कितनी है यानी वह कितनी सुरक्षित और असरदार है। इसके बाद ही इमरजेंसी यूज अप्रूवल (EUA) दिया जा सकेगा। अब कंपनी को देश में चल रहे फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल्स का सेफ्टी और एफिकेसी डेटा जमा करना होगा।

भारत बायोटेक की अमेरिकी कंपनी ऑक्युजेन के साथ डील
एस्ट्राजेनेका और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन-कोवीशील्ड को दिसंबर के आखिर तक इमरजेंसी अप्रूवल मिल सकता है। इसके लिए ड्रग रेगुलेटर की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी ने डेटा मांगा था। यह डेटा भारत में वैक्सीन के ट्रायल्स कर रही सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने जमा कर दिया है।

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फोटो भोपाल के एक अस्पताल की है, जहां मेडिकल ऑफिसर एक व्यक्ति को कोवैक्सिन का ट्रायल डोज दे रही है। भोपाल में पिछले दिनों भारत बायोटेक की कोवैक्सिन के तीसरे फेज के ट्रायल्स हुए।

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