कृषि मंत्री तोमर से मुलाकात के बाद हरियाणा के CM खट्‌टर बोले- किसानों से 2-3 दिन में बातचीत की उम्मीद


किसानों को मनाने की सरकार की कोशिशें कामयाब होती नजर नहीं आ रही हैं। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की चिट्‌ठी और प्रधानमंत्री मोदी की अपील के बावजूद किसानों का प्रदर्शन 24वें दिन भी जारी है। इस बीच शनिवार शाम हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कृषि मंत्री से मुलाकात की। खट्टर ने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि किसानों के साथ अगले 2-3 दिनों में बातचीत होगी।

खट्टर ने कहा- आंदोलन का हल जल्द से जल्द और बातचीत के जरिए ही निकाला जाना चाहिए। सूत्रों के मुताबिक, खट्टर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी मिल सकते हैं। इधर, दिल्ली में बढ़ती ठंड और सर्द हवा के बावजूद किसान दिल्ली-यूपी और हरियाणा बॉर्डर पर डटे हुए हैं।

नए कृषि कानूनों के बारे में चर्चा करते हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्‌टर। मीटिंग केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के आवास पर हुई।

सांसद बेनीवाल का संसद की तीन समितियों से इस्तीफा
राजस्थान में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के एक मात्र सहयोगी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) चीफ ने गठबंधन से अलग होने के संकेत दे दिए हैं। RLP चीफ और नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने शनिवार को संसद की तीन अलग-अलग समितियों की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। हालांकि NDA से गठबंधन रहेगा या नहीं, इसका फैसला 26 दिसंबर को किया जाएगा।

उन्होंने कहा, ‘ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार आंदोलन को खत्म करना चाहती है। इसलिए हमारी पार्टी ने 26 दिसंबर को 2 लाख किसानों और युवाओं के साथ दिल्ली कूच करने का फैसला किया है।’

सिंघु बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों के बीच सिंगर बब्बू मान।

आंदोलन कर रहे किसानों को समर्थन देने कई सेलेब्रिटी भी लगातार पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को सिंगर बब्बू मान और एक्ट्रेस स्वरा भास्कर पहुंची।

मोबाइल चार्ज करने घर से सोलर पैनल लेकर आए

मोबाइल चार्ज करने में परेशान न हो इसलिए किसान सोलर पैनल और ट्रैक्टर की बैटरी चार्ज कर रहे हैं। एक किसान अमृत सिंह ने बताया कि वे अपने साथ सोलर प्लेट लेकर आए हैं कि अगर फोन की बैटरी डिस्चार्ज हो जाएगी तो घर पर बात नहीं हो पाएगी। यहां कोई सुविधा मिलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार क्या सुविधा देगी, वह तो हमारी मांग तक नहीं मान रही है।

चिदंबरम ने प्रधानमंत्री को निशाने पर लिया

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी.चिदंबरम ने MSP के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाने पर लिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर झूठ फैलाने का आरोप लगाया है। यहां तीन तथाकथित झूठ हैं, जिन पर शायद वह टिप्पणी करना चाहें। किसानों के विरोध का समन्वय करने वाली AIKSCC ने कहा है कि किसान 900 रुपये प्रति क्विंटल पर धान बेच रहे हैं, हालांकि एमएसपी 1,870 रुपये प्रति क्विंटल है। क्या यह झूठ है?

प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर आरोप लगाया था कि वह किसानों को भड़का रहा है। पूर्व वित्त मंत्री का यह बयान इसी आरोप के जवाब में आया है। उन्होंने तब्लीगी जमात और हाथरस मामले का भी जिक्र किया है।

कांग्रेस ने कहा- मोदी सरकार ने किसानों पर 3 वार किए

सुरजेवाला बोले- सत्ता संभालते ही मोदी सरकार ने किसानों को दरकिनार किया और सारे सरकारी संसाधन पूंजीपतियों को दे दिए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने किसानों पर 3 वार किए।
पहला वार: 12 जून 2014 को मोदी सरकार ने सारे राज्यों को पत्र लिखकर फरमान जारी कर दिया कि समर्थन मूल्य के ऊपर अगर किसी भी राज्य ने किसानों को बोनस दिया तो उस राज्य का अनाज समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदा जाएगा और किसान भाइयों को बोनस से वंचित कर दिया गया।

दूसरा वार: दिसंबर 2014 में मोदी सरकार किसानों की भूमि के उचित मुआवजे कानून 2013 को खत्म करने के लिए एक के बाद एक तीन अध्यादेश लाई, ताकि किसानों की जमीन आसानी से छीनकर पूंजीपतियों को सौंपी जा सके।

तीसरा वार: फरवरी 2015 में मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र देकर साफ इनकार कर दिया कि अगर किसानों को समर्थन मूल्य लागत का 50% से ऊपर दिया गया, तो बाजार खराब हो जाएगा यानी फिर पूंजीपतियों के पाले में खड़े हो गए।

अपडेट्स

  • ऑल इंडिया किसान संघर्ष कॉर्डिनेशन कमेटी के सरदार वीएम सिंह ने कहा कि रविवार 11 बजे दिल्ली-गाजीपुर बॉर्डर पर ट्रैक्टर्स की मूवमेंट को रोकने को लेकर एडमिनिस्ट्रेशन के साथ मीटिंग की जाएगी। अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं, तो दोनों तरफ की सड़कें ब्लॉक कर देंगे।
  • चिपको आंदोलन के नेता सुंदरलाल बहुगुणा ने किसान आंदोलन को समर्थन दिया है। बहुगुणा ने वीडियो रिलीज कर कहा- मैं अन्नदाताओं की मांगों का समर्थन करता हूं। देश की खाद्य सुरक्षा देने में किसान देश के असली हीरो हैं।
  • किसानों का कहना है कि वे कृषि कानूनों के खिलाफ लंबी लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं। ठंड को देखते हुए ज्यादा टेंट लगा रहे हैं।
  • उद्योग संगठन FICCI ने कहा है कि किसान आंदोलन के चलते नॉर्दर्न रीजन की इकोनॉमी को हर दिन 3000 करोड़ रुपए का नुकसान होने का अनुमान है।

मोदी की अपील- कृषि मंत्री की चिट्ठी जरूर पढ़ें
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने गुरुवार को किसानों के नाम चिट्ठी लिखी, जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) समेत दूसरी चिंताओं पर भरोसा दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के साथ-साथ पूरे देश से तोमर की चिट्ठी पढ़ने की अपील करते हुए इसे सोशल मीडिया पर शेयर किया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सरकार कानून होल्ड करने का रास्ता सोचे
किसानों को सड़कों से हटाने की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि किसानों को विरोध करने का हक है, लेकिन किसी की संपत्ति या किसी की जान को कोई खतरा नहीं होना चाहिए। साथ ही सलाह दी कि विरोध के तरीके में बदलाव करें, किसी शहर को जाम नहीं किया जा सकता। अदालत ने सरकार से भी पूछा- इस मामले की सुनवाई पूरी होने तक क्या आप कृषि कानूनों को रोक सकते हैं?

अभी नए कृषि कानून लागू करने के नियम ही नहीं बने, जैसे CAA के नहीं बने हैं
लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी आचारी ने कृषि कानूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के कमेंट से जुड़े सवालों के जवाब बताए।

क्या किसी कानून पर अमल रोका जा सकता है?
बिल पर अमल का अधिकार कार्यपालिका का है। अमल के लिए नियम और दिशा-निर्देश होते हैं। कृषि कानूनों को लागू करने के नियम अभी बने ही नहीं हैं। यानी वे लागू ही नहीं हैं, तो फिर उन्हें रोक कैसे सकते हैं।

क्या पहले कभी ऐसा हुआ है कि बिल संसद में पारित हो गया और उस पर अमल नहीं हुआ?
इसका सबसे बड़ा उदाहरण नागरिकता कानून संशोधन एक्ट (CAA) है। यह पिछले साल संसद से पारित हुआ था। लेकिन, अभी तक इस कानून को लागू करने के नियम और दिशा-निर्देश नहीं बनाए गए हैं। इसलिए यह कानून अभी तक कोल्ड स्टोरेज में है।

अगर सरकार जल्दी ही नियम बना लेती है तो?
सुप्रीम कोर्ट चाहे तो केस चलने तक अमल के नियम नहीं बनाने का आदेश भी दे सकता है।

सुप्रीम कोर्ट का इरादा क्या लगता है?
सरकार और किसानों में बातचीत में प्रगति नहीं हो पा रही। कोर्ट संभावना तलाश रहा है कि क्या बातचीत जारी रहने तक कानूनों को बेअसर रखा जा सकता है। मुझे लगता है कि कोर्ट का यह कदम समाधान की दिशा में है।

क्या कोई सरकार कानूनों को निष्प्रभावी करने के लिए अध्यादेश भी ला सकती है?
नहीं। किसी भी कानून को निष्प्रभावी या रद्द करने के लिए संसद का सत्र एकमात्र विकल्प है। वैसे कानून पर अमल रोकने के लिए नियम नहीं बनाना ही ज्यादा कारगर तरीका है।

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