केरल से शुरुआत हुई, लॉकडाउन के तीन महीने में 1.98 मरीज मिले थे, छूट मिलते ही केस मिलने की रफ्तार 725% बढ़ी


देश में कोरोना मरीजों का आंकड़ा एक करोड़ के पार हो चुका है। 30 जनवरी को केरल में पहला संक्रमित मिला था। तब से 324 दिन के अंदर ये आंकड़ा एक से एक करोड़ तक पहुंच गया। अब तक 1.45 लाख से ज्यादा लोग संक्रमण के चलते जान गंवा चुके हैं। हालांकि, राहत की बात है कि देश में कोरोना मरीजों के ठीक होने की रफ्तार भी काफी तेज है। अब तक 95.41% यानी 95 लाख से ज्यादा लोग रिकवर हो चुके हैं। 3.05 लाख मरीज ऐसे हैं जिनका इलाज चल रहा है।

सितंबर में कोरोना का पीक आया
अप्रैल और मई तक हर दिन देश में दो से पांच हजार नए मामले सामने आ रहे थे। जून में यह बढ़कर पांच से बीस हजार हो गया। जुलाई में हर दिन 20 से 57 हजार लोग संक्रमित मिलने लगे। अगस्त में यह आंकड़ा 60 से 75 हजार के बीच हो गया। सितंबर में एक दिन में 97 हजार तक मामले सामने आए। 17 सितंबर को देश में कोरोना का पीक था। मतलब तब सबसे ज्यादा लोग संक्रमित पाए गए हैं।

17 सितंबर को देश में 10.17 लाख एक्टिव मरीज थे। जो अब तक के सबसे ज्यादा हैं। एक्टिव मरीज मतलब ऐसे मरीज जिनका इलाज चल रहा है। तब से एक्टिव केस में लगातार गिरावट जारी है। अब देश में ऐसे केवल 3.05 लाख मरीज रह गए हैं जिनका इलाज चल रहा है। बाकी या तो ठीक हो चुके हैं या फिर उनकी मौत हो चुकी है।

देश में ऐसे बढ़ा कोरोना

  • 30 जनवरी को चीन के वुहान शहर से लौटी 20 साल की महिला कोरोना संक्रमित पाई गई। यह देश का पहला केस था।
  • 03 फरवरी तक केरल में ही तीन नए केस आ चुके थे। ये सभी लोग विदेश यात्रा से लौटे थे।
  • 3 मार्च तक देश में कुल छह केस रिपोर्ट हुए थे।
  • 04 मार्च को इटली के एक टूरिस्ट ग्रुप के 14 सदस्यों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई।
  • 12 मार्च को साऊदी अरब से लौटे 76 साल के एक कोरोना मरीज की मौत हो गई। संक्रमण से देश में यह पहली मौत थी।
  • 22 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता कर्फ्यू का आह्वान किया।
  • 24 मार्च को प्रधानमंत्री ने 21 दिनों के लॉकडाउन का ऐलान किया। यह लॉकडाउन 25 मार्च से प्रभावी हुआ।
  • 14 अप्रैल को यह लॉकडाउन 3 मई तक बढ़ा दिया गया। फिर इसे दो बार और बढ़ाया गया।
  • 3 मई से 17 मई और फिर 17 से 31 मई तक लॉकडाउन बढ़ा।
  • 1 जून से लॉकडाउन में छूट मिलना शुरू हुई और अब तक पूरा देश लगभग पूरी तरह से खुल चुका है।

लॉकडाउन से छूट मिलते ही कोरोना की रफ्तार बढ़ गई
25 मार्च से 31 मई तक देश में 1.98 लाख लोग कोरोना से संक्रमित पाए जा चुके थे। लॉकडाउन से छूट मिलते ही कोरोना की रफ्तार तेज हो गई। 725% की रफ्तार से नए केस सामने आने लगे। 16 जुलाई तक संक्रमितों की संख्या 10 लाख हो गई। इसके अगले 21 दिनों में 10 लाख से 20 लाख मरीज हो गए। सबसे तेज 40 से 50 लाख केस होने में महज 11 दिन लगे थे।

11 शहरों में 27% कोरोना मरीज
संक्रमण का सबसे ज्यादा असर राजधानी दिल्ली, मुंबई समेत 11 शहरों में है। देश के 27% कोरोना मरीज इन्हीं शहरों में हैं। इन्हीं शहरों में सबसे ज्यादा लोगों ने जान गंवाई है। इनमें महाराष्ट्र के पांच और पश्चिम बंगाल के दो शहर हैं। देश के सबसे बड़े राज्य यूपी का एक भी शहर इस सूची में शामिल नहीं है।

16 करोड़ लोगों की जांच हुई, इनमें 6.25% संक्रमित मिले
देश में अब तक 16 करोड़ लोगों की जांच हो चुकी है। मतलब देश की 11% आबादी का टेस्ट हुआ है। इनमें 6.25% लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। मरीजों के मिलने की सबसे ज्यादा रफ्तार महाराष्ट्र में है। यहां पॉजिटिविटी रेट 15.8% है। इसके अलावा गोवा में 13.1%, चंडीगढ़ में 11.4%, नगालैंड में 10%, केरल में 9.7% की रफ्तार से कोरोना मरीज मिल रहे हैं।

कुछ खास जानकारी

  • टेस्टिंग के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे हैं। यहां 2.2 करोड़ लोगों की जांच हो चुकी है।
  • सबसे ज्यादा 12% एक्टिव मरीज हिमाचल प्रदेश में हैं।
  • रिकवरी के मामले में दादरा एवं नगर हवेली सबसे आगे है। यहां अब तक 98.8% लोग ठीक हो चुके हैं। आंध्र प्रदेश में 98.7% लोग ठीक हो चुके हैं।
  • डेथ रेट के मामले में पंजाब आगे है। यहां अब तक 3.2% मरीजों की मौत हो चुकी है। महाराष्ट्र में 2.6% मरीजों की मौत हुई है।

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