सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अभी आंदोलन और लोगों के अधिकारों पर फैसला देंगे, कानूनों की वैधता पर बाद में बात होगी


नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का आज 22वां दिन है। किसानों को सड़कों से हटाने की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में आज फिर सुनवाई हो रही है।पिटीशनर का कहना है कि आंदोलन के चलते रास्ते जाम होने से जनता परेशान है और कोरोना का खतरा भी बढ़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कृषि कानूनों की वैधता पर फिलहाल कोई फैसला देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि आज सिर्फ किसानों के प्रदर्शन और आम लोगों के अधिकारों को लेकर फैसला दिया जाएगा, कानूनों की वैधता के मुद्दे पर इंतजार किया जा सकता है।

अपडेट्स

  • टिकरी बॉर्डर पर आंदोलन में शामिल 37 साल के जयसिंह को हार्ट अटैक आने से गुरुवार को मौत हो गई। वे बठिंडा के तुंगवाली गांव के रहने वाले थे। आंदोलन में शामिल लोगों में से अब तक 7 की अलग-अलग वजहों से मौत हो चुकी है।
  • भारतीय किसान यूनियन (दोआबा) के नेता एम एस राय का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का नोटिस नहीं मिला है। जब मिलेगा, तब सभी किसान संगठन चर्चा कर आगे का फैसला लेंगे।
  • छोटे कारोबारियों के हितों के लिए काम करने वाले कन्फेडरेडशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और पीयूष गोयल को चिट्ठी लिखी है। उसका कहना है कि किसानों के मुद्द पर सुप्रीम कोर्ट ने जो कमेटी बनाने के लिए कहा है, उसमें भी CAIT को भी शामिल किया जाए।

खापों की चेतावनी- कानून वापस नहीं हुए तो भाजपा को नुकसान होगा
उत्तर प्रदेश की 18 खाप पंचायतों ने किसान आंदोलन का समर्थन किया है। ये खापें आज दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन में शामिल होकर महापंचायत करेंगी। महापंचायत को लेकर खुफिया विभाग अलर्ट है। बालियान खाप के चौधरी नरेश टिकैत ने कहा है कि अब तक दिल्ली में 26 जनवरी को नकली झांकियां निकाली जाती थीं, लेकिन इस बार किसानों की असली झांकी भी परेड में शामिल होगी। अगर सरकार कृषि कानून वापस नहीं लेती तो आने वाले चुनाव में भाजपा को बड़ा नुकसान होगा।

‘मांगें पूरी होने तक डटे रहेंगे’
गाजीपुर बॉर्डर पर आंदोलन में शामिल एक किसान ने कहा कि कड़ाके की ठंड के बावजूद हम यहां डटे हैं। मांगे पूरी होने तक यहां से नहीं हटेंगे, भले ही बारिश आ जाए। दूसरे किसान ने कहा कि अलाव और कंबलों के सहारे सर्दी से बचाव कर रहे हैं। यहां सभी सुविधाएं बेहतर हैं, बस वॉशरूम गंदे हैं।

सिख संत ने किसानों के समर्थन में आत्महत्या की
65 साल के संत बाबा राम सिंह सिंघु बॉर्डर पर किसानों के धरने में शामिल थे। बुधवार को उन्हें मंच पर पाठ करना था, इसलिए मंच के पास ही खड़े थे। दोपहर 2.30 बजे उन्होंने अपने ड्राइवर और साथी को कुछ दूर भेजा और अचानक खुद को गोली मार ली। उनका सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें लिखा है- मेरा यह कदम किसानों के हक और सरकारी जुल्म के खिलाफ है। किसानों का दर्द देखकर दुखी हूं।

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Farmers Protest: Kisan Andolan Delhi Burari LIVE Update | Haryana Punjab Farmers Delhi Chalo March Latest News Today 17 December

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