Z सिक्योरिटी तो थी ही अब बुलेट प्रूफ गाड़ी भी मिलेगी, 3 दिन पहले बंगाल में हमला हुआ था


भाजपा महासचिव और पश्चिम बंगाल में पार्टी प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय की सुरक्षा में इजाफा किया गया है। उनके पास पहले से Z श्रेणी की सिक्योरिटी थी। अब उन्हें बुलेटप्रूफ गाड़ी भी मिलेगी। 4 दिन पहले पश्चिम बंगाल में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर हमला हुआ था, जिसमें कैलाश विजयवर्गीय को भी चोटें आई थी। भाजपा हमले के पीछे तृणमूल कांग्रेस को जिम्मेदार बता रही है।

सुरक्षा बढ़ाए जाने के बाद विजयवर्गीय ने दैनिक भास्कर से फोन पर चर्चा की। उनसे हुई बातचीत के अंश…

सवाल- बुलेट प्रूफ गाड़ी मिल गई, लेकिन कोरोना को लेकर क्या है?
जवाब- Z सुरक्षा तो मुझे पहले से ही मिली है। अभी बुलेट प्रूफ गाड़ी दी जा रही है। नड्डा के पॉजिटिव आने पर खुद का टेस्ट करवाए जाने को लेकर कहा कि 6 महीने से घूम रहा हूं। अभी मुझमें किसी प्रकार का कोई लक्षण नजर नहीं आ रहा। बस, सावधानी रखनी जरूरी है।

सवाल- आपकी सुरक्षा को लेकर प्रदेश और केंद्र सरकार कितनी गंभीर है?
जवाब- केंद्र सरकार ने हमले को बहुत ही गंभीरता से लिया है। मेरी सुरक्षा बढ़ाने के साथ अधिकारियों को नोटिस भी दिया है। केंद्र के नोटिस के बाद भी शायद ममता जी ने उन्हें रिलीज करने से मना कर दिया। ममता जी को सत्ता का अहंकार है, संघीय ढांचे के अंदर जो राज्य और केंद्र सरकार के संबंध हैं, उसकी अवहेलना है। बाबा साहब ने जो संविधान लिखा है, वे उसका भी पालन नहीं करना चाहतीं। जब कोई व्यक्ति अहंकार में हो तो फिर लोकतंत्र की अपने आप ही हत्या होती है। जब सत्ता का अहंकार राहुल गांधी का नहीं रहा तो ममता जी का भी नहीं रहेगा।

सवाल- क्या पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की जरूरत है?
जवाब- यहां पर डेमोक्रेसी की आवश्यकता है, विकास की आवश्यकता है, संविधान अनुसार सरकार चले इसकी आवश्यकता है। मुझे लगता है, आगामी विधानसभा चुनाव इन्हीं मुद्दों पर होंगे। राष्ट्रपति शासन लगाने का निर्णय करना केंद्र सरकार का काम है। हमने यह मांग रखी है। भाजपा ने हमेशा अनुच्छेद 356 लगाने का विरोध किया है। हम चुनी हुई सरकार को हटाने के पक्ष में नहीं रहते। यहां परिस्थितियां ऐसी बन गई हैं कि राष्ट्रपति शासन लगना चाहिए।

सवाल- बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर क्या तैयारी है?
जवाब- हमने 6 युवा मंत्रियों को बंगाल बुलाया है। हमारा माहौल तो बन गया, लेकिन मैनेजमेंट के लिए हमने इन्हें बुलाया है। इसमें मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा, केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल, राजस्थान से गजेंद्र सिंह शेखावत समेत कुछ युवा मंत्रियों को भी बुलाया है। हमें उम्मीद है हम सब मिलकर विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करेंगे, क्योंकि ममता जी की यहां जमीन खिसक गई है। जिस प्रकार हमने से बूथ लेवल पर काम किया, हमने उनके भ्रष्टाचार को उजागर किया, इससे वे घबराहट में हैं।

हमले के बाद बंगाल में राजनीति गरमाई
10 दिसंबर को नड्डा के काफिले पर उस वक्त हमला हुआ था, जब वे कोलकाता से 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर जा रहे थे। इसमें विजयवर्गीय भी घायल हो गए थे। डायमंड हार्बर ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी का संसदीय इलाका है। प्रदर्शनकारियों ने नड्डा के काफिले का रास्ता रोकने की कोशिश की थी।

11 दिसंबर को जगदीप धनखड़ ने ममता सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आग से मत खेलो, यह बहस छोड़नी होगी कि कौन भीतरी और कौन बाहरी है। जो हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्यमंत्री को संविधान मानना चाहिए। वे अपनी जिम्मेदारियों से नहीं हट सकतीं। राज्य में कानून व्यवस्था लगातार बिगड़ रही है।

अब केंद्र और राज्य सरकार आमने-सामने
12 दिसंबर को गृह मंत्रालय ने राज्य में तैनात तीन IPS अफसरों को डेपुटेशन पर वापस बुला लिया। बताया जाता है कि नड्डा की सुरक्षा के जिम्मेदारी इन्हीं अफसरों पर थी।

इसी बीच, गृह मंत्रालय ने 14 दिसंबर को बंगाल सरकार के दो बड़े अधिकारियों को तलब किया था। तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने गृह सचिव अजय भल्ला को खत लिखकर इस कदम को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बंगाल के अफसर दिल्ली नहीं पहुंचे।

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भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के काफिले पर बंगाल में 10 दिसंबर को TMC समर्थकों ने पथराव कर दिया था। हमले में कैलाश विजयवर्गीय घायल हो गए थे। (फाइल फोटो)

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