किसान नेता बोले- पूरे देश में आंदोलन तेज होगा, अंबानी-अडानी के प्रोडक्ट और भाजपा नेताओं का बायकॉट करेंगे


कृषि कानूनों पर सरकार और आंदोलनकारी किसानों के बीच 6 दौर की बातचीत और सरकार के प्रस्ताव भेजने पर भी कोई रास्ता नहीं निकल सका है। गृहमंत्री अमित शाह से किसानों की मंगलवार को हुई बैठक के बाद बुधवार को सरकार ने किसान नेताओं को प्रस्ताव भेजा, लेकिन किसानों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। किसान नेताओं ने कहा कि प्रस्ताव गोल-मोल है। सरकार भलाई की बात कह रही है, लेकिन ये कैसे करेगी, स्पष्ट नहीं है।

प्रस्ताव पर विचार-विमर्श के बाद किसानों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और आंदोलन की आगे की दशा-दिशा के बारे में बताया। किसानों ने 4 अहम ऐलान किए…

1. किसान शनिवार को देशभर में टोल प्लाजा फ्री कर देंगे। दिल्ली-जयपुर हाईवे को बंद किया जाएगा।
2. देशभर के सभी जिला मुख्यालयों में 14 दिसंबर को धरना दिया जाएगा। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और राजस्थान के किसान इसमें शामिल होंगे। जो शामिल नहीं हो पाएंगे, वो दिल्ली कूच करेंगे।
3. अंबानी-अडानी के मॉल, प्रोडक्ट और टोल का बायकॉट किया जाएगा। जियो के प्रोडक्ट्स का भी बायकॉट किया जाएगा। जियो की सिम को पोर्ट करवाया जाएगा।
4. भाजपा नेताओं का नेशनल लेवल पर बायकॉट करेंगे। उनके बंगलों और दफ्तरों के सामने प्रदर्शन किया जाएगा। कानूनों की वापसी तक आंदोलन नहीं थमेगा और ये तेज होता जाएगा।

सरकार ने किसानों की सबसे बड़ी मांग ठुकराई

सरकार ने किसानों के 10 अहम मुद्दों में से सबसे बड़ी मांग यानी कृषि कानून रद्द करने की मांग को सिरे से ठुकरा दिया। 5 मुद्दों पर सफाई देने की बात कही और 4 मुद्दों पर मौजूदा व्यवस्था में बदलाव का भरोसा दिया।

किसानों का मुद्दा सरकार के जवाब
कृषि सुधार कानूनों को रद्द करें। ऐतराज है तो हम खुले मन से विचार को तैयार हैं।
MSP पर चिंताएं हैं। फसलों का कारोबार निजी हाथों में चला जाएगा। सरकार MSP पर लिखित आश्वासन देगी।
किसानों की जमीन पर बड़े उद्योगपति कब्जा कर लेंगे। किसान की जमीन पर कोई ढांचा भी नहीं बनाया जा सकता। ढांचा बना तो मिल्कियत किसान की।
APMC मंडियां कमजोर होंगी। किसान प्राइवेट मंडियों के चंगुल में फंस जाएगा। राज्य सरकारें प्राइवेट मंडियों का रजिस्ट्रेशन कर सकें और उनसे सेस वसूल सकें, ऐसी व्यवस्था करेंगे।
किसानों की जमीन की कुर्की हो सकती है। वसूली के लिए कुर्की नहीं होगी। फिर भी सफाई देंगे।
किसान सिविल कोर्ट में नहीं जा सकते। यह विकल्प दिया जा सकता है।
पैन कार्ड दिखाकर फसल खरीद होगी तो धोखा भी होगा। राज्य सरकारें फसल खरीदने वालों के लिए रजिस्ट्रेशन का नियम बना सकेंगी।
पराली जलाने पर जुर्माना और सजा हो सकती है। किसानों की आपत्तियों को दूर किया जाएगा।
एग्रीकल्चर एग्रीमेंट के रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था नहीं है। एग्रीमेंट होने के 30 दिन के अंदर उसकी एक कॉपी एसडीएम ऑफिस में जमा कराने की व्यवस्था करेंगे।
नया बिजली विधेयक वापस लें। विधेयक चर्चा के लिए है। किसानों के बिजली बिल के पेमेंट की मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं होगा।

5 विपक्षी नेता राष्ट्रपति से मिले, राहुल बोले- हिंदुस्तान का किसान डरेगा नहीं
20 सियासी दल किसानों की मांगों का समर्थन कर रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार समेत विपक्ष के 5 नेता बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिले। इनमें माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, सीपीआई के डी. राजा और डीएमके के एलंगोवन भी शामिल थे।

राहुल गांधी ने कहा, ‘किसान ने देश की नींव रखी है और वो दिनभर इस देश के लिए काम करता है। ये जो बिल पास किए गए हैं, वो किसान विरोधी हैं। प्रधानमंत्रीजी ने कहा था कि ये बिल किसानों के हित के लिए है, सवाल ये है कि किसान इतना गुस्सा क्यों है। इन बिलों का लक्ष्य मोदीजी के मित्रों को एग्रीकल्चर सौंपने का है। किसानों की शक्ति के आगे कोई नहीं टिक पाएगा। हिंदुस्तान का किसान डरेगा नहीं, हटेगा नहीं, जब-तक ये बिल रद्द नहीं कर दिया जाता।’

सरकार से मिला ड्राफ्ट दिखाते किसान।

सरकार ने कहा- वर्क-इन-प्रोग्रेस
कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देने के लिए सरकार के तीन मंत्रियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें किसानों को भेजे गए प्रस्ताव के बारे में पूछा गया तो सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने जवाब दिया। उन्होंने कहा- जब एक अंतिम दौर की बातचीत हो रही हो, तो यह वर्क-इन-प्रोग्रेस माना जाता है। इसकी रनिंग कमेंट्री नहीं हो सकती। किसानों के मुद्दों पर सरकार संवेदनशील है।सरकार ने किसानों से 6 बार चर्चा की है। उम्मीद है अब आखिरी दौर होगा।

‘सरकार जिद पर अड़ी तो किसान भी पीछे नहीं हटेंगे’
भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा- किसान पीछे नहीं हटेंगे। यह सम्मान का मुद्दा है। क्या सरकार कानून वापस नहीं लेना चाहती? क्या किसानों पर अत्याचार होगा? अगर सरकार जिद पर अड़ी है तो, किसान भी अपनी बात पर डटे हैं। कानून वापस होने ही चाहिए।

सरकार ने किसानों की शंकाओं पर कानून में बदलाव के प्रस्ताव दिए हैं।

अकाली दल के कार्यकर्ता फ्री डीजल बांट रहे
आंदोलन में शामिल होने के लिए दिल्ली बॉर्डर की तरफ जा रहे लोगों को दिल्ली-अमृतसर हाईवे के एक पेट्रोल पंप पर फ्री डीजल दिया जा रहा है। शिरोमणि अकाली दल के कार्यकर्ताओं का कहना है कि पंजाब के ज्यादा से ज्यादा लोग आंदोलन में शामिल हो सकें, इसलिए यह सुविधा दे रहे हैं। इसके लिए स्थानीय युवाओं और अपने NRI दोस्तों की मदद ले रहे हैं।

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