फाइजर वैक्सीन कितने समय तक सुरक्षा देगी, ये सालभर बाद ही पता चलेगा


दुनिया में कोरोनावायरस के आने के एक साल बाद उसके खात्मे की दवा भी आ गई है। ब्रिटेन ने बुधवार को अमेरिकी कंपनी फाइजर और जर्मन कंपनी बायोएनटेक की संयुक्त कोरोना वैक्सीन के आपात इस्तेमाल को मंजूरी दे दी। इसी के साथ तीन ट्रायल पूरे कर चुकी किसी वैक्सीन को मंजूरी देने वाला ब्रिटेन दुनिया का पहला देश भी बन गया।

ब्रिटिश पीएम बोरिस जॉनसन ने कहा कि टीका जिंदगियां बचाने के साथ ही हालात को सामान्य बनाने में मदद करेगा। यूके के स्वास्थ्य मंत्री मैट हैन्कॉक ने कहा- ‘क्रिसमस से पहले यानी अगले हफ्ते से ही 8 लाख डोज के साथ ब्रिटेन के आम लोगों को टीके लगने शुरू हो जाएंगे।’ फाइजर बेल्जियम में वैक्सीन बना रही है। वहां से नए साल तक एक करोड़ से ज्यादा वैक्सीन डोज ब्रिटेन पहुंचाए जाएंगे।

ब्लूमबर्ग ने फाइजर वैक्सीन, उसके बनने, लगाए जाने और इस पर भारत के रुख पर बातें साझा कीं। सवाल-जवाब में समझें…

10 साल में बनने वाली वैक्सीन 10 माह में कैसे बन गई? क्या कोई शॉर्टकट अपनाया?
आखिरी बार 1960 में सबसे तेजी से मम्स (गलसुआ) की वैक्सीन बनी थी। इनमें 4 साल लगे थे। कोरोना वैक्सीन 10 महीने में बनी, लेकिन कोई शॉर्टकट नहीं अपनाया गया। सभी चरणों के ट्रायल हुए। ब्रिटेन सरकार ने शोध पर 59 हजार करोड़ रु. खर्च किए। नियामक ने हजारों पन्नों के दस्तावेजों की जानकारी में उलझने के बजाय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से डेटा का अध्ययन किया। इससे समय बचा और मंजूरी की प्रक्रिया तेज हुई। नियामक MHRA की प्रमुख जून रैनी ने कहा कि इसके लिए पूरी टीम ने चौबीसों घंटे काम किया।

लोग कैसे जान पाएंगे कि यह टीका सुरक्षित है?
फाइजर-बायोएनटेक ने 44 हजार लोगों पर ट्रायल किए हैं। किसी पर गंभीर दुष्प्रभाव नहीं हुआ। सिर्फ थकान और सिरदर्द के मामले थे।

भारत में फाइजर की वैक्सीन आनी क्यों मुश्किल है? क्या कंपनी से सरकार की बात हुई है?
इस टीके की पैकिंग, स्टोरिंग से लेकर लगाने तक माइनस 70 डिग्री तापमान में रखना जरूरी है। भारत में ऐसी अभी कोई तैयारी नहीं है। फाइजर ने भारत में वैक्सीन लॉन्च करने को लेकर भी अभी कोई बात नहीं कही है। सूत्रों का कहना है कि भारत सरकार ने भी फाइजर से वैक्सीन के करार को लेकर बात नहीं की है।

तो क्या ये वैक्सीन सिर्फ ब्रिटेन में ही लगेगी?
ऐसा नहीं है। फाइजर ने अमेरिका में भी अप्रूवल के लिए आवेदन कर दिया है। इसके अलावा जापान और यूरोपीय यूनियन (EU) के साथ भी करार है। अभी कंपनी की जितनी निर्माण क्षमता है, उसे देखते हुए पहले के करार पूरे करने में ही कंपनी को एक साल लग सकता है। हां, लेकिन ये हो सकता है कि फाइजर निर्माण के लिए दूसरे देशों की कंपनियों से भी संपर्क करे।

फाइजर कितने टीके बनाएगी?
फाइजर और बायोएनटेक मिलकर दिसंबर में 5 करोड़ डोज बना लेंगी। 2021 में 130 करोड़ डोज बनाने की तैयारी है। इसके लिए फाइजर को दूसरे निर्माताओं की मदद लेनी पड़ सकती है। फाइजर-बायोएनटेक ने ब्रिटेन के साथ अगले साल (2021) तक 4 करोड़ वैक्सीन डोज उपलब्ध कराने का करार किया है। दो करोड़ लोगों को दो-दो डोज लगेंगे। कंपनी बाकी की वैक्सीन दूसरे देशों को देगी।

ब्रिटेन में पहले किसे वैक्सीन मिलेगी?
सरकार की प्राथमिकता में घरों में इलाजरत मरीज और हेल्थ वर्कर हैं। उसके बाद 80 साल से ज्यादा के बुजुर्गों और पहले से किसी दूसरी बीमारी से जूझ रहे लोगों को वैक्सीन दी जाएगी। फिर अलग-अलग चरणों में 75, 70 और 65 साल के ऊपर के लोगों को दी जाएगी। बच्चों को वैक्सीन देने का अभी कोई प्लान नहीं है।

अगर कोई भारतीय या अन्य देश का नागरिक इंग्लैंड में रह रहा है, क्या उसे भी वैक्सीन दी जाएगी?
टीकाकरण के लिए एक विशेष कमेटी बनी है। वह दो-तीन दिन में सिफारिश देगी कि बाहर से आए किस वर्ग को पहले देना है, किसे बाद में।

टीका लगने के बाद क्या चुनौती रहेगी?
यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी के प्रमुख एमर कुक के मुताबिक, टीका लगाने के बाद परिणाम जानने के लिए उन लोगों की निगरानी करनी होगी। यही सबसे बड़ी चुनौती रहेगी।

यह टीका कितने समय तक इम्यूनिटी देगा?
इसे समझने में वैज्ञानिकों को अभी एक साल और लग सकता है। क्योंकि, किसी भी वैक्सीन के असर का आकलन पहले करना लगभग असंभव है। लेकिन, एक बात साफ है कि अभी तक जिन कंपनियों के ट्रायल तीसरे चरण में हैं, उनके कोई गंभीर दुष्परिणाम सामने नहीं आए।

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