किसानों के समर्थन में प्रकाश सिंह बादल ने पद्मविभूषण लौटाया, ताकि कैप्टन फायदा न उठा सकें


कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के समर्थन में अवॉर्ड वापसी का दौर फिर शुरू हो गया है। पहला नाम है पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और शिरोमणि अकाली दल लीडर प्रकाश सिंह बादल का। उन्होंने 2015 में मिला पद्म विभूषण अवॉर्ड लौटा दिया है। दूसरा नाम है शिरोमणि अकाली दल (डेमोक्रेटिक) के प्रमुख और राज्यसभा सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा का। उन्होंने भी अपना पद्म भूषण अवॉर्ड लौटाने का ऐलान किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडियन हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और पद्मश्री परगट सिंह, पद्मश्री रेसलर करतार सिंह, अर्जुन अवार्डी हॉकी प्लेयर राजबीर कौर और बास्केटबॉल प्लेयर अर्जुन सिंह चीमा ने भी अपने अवॉर्ड लौटाने का ऐलान किया है।

SAD की सम्मान वापसी की सियासत के मायने समझिए

1. भाजपा से अलग होने पर हुए नुकसान की भरपाई

पंथक राजनीति करने वाली शिरोमणि अकाली दल (SAD) की पंजाब के किसानों में गहरी पैठ थी। लेकिन, पिछले चुनाव में यह जनाधार टूटता नजर आया। ऐसे में अब किसानों को साधने के लिए अकाली दल व कांग्रेस हर तरह का दांव खेल रहे हैं। अकाली दल के लिए यह इसलिए भी अहम है, क्योंकि भाजपा से अलग होने के बाद शहरी वोट बैंक में उसे नुकसान होगा, जिसकी भरपाई की कोशिश के लिए ग्रामीण क्षेत्रों पर निर्भर रहना होगा। ऐसे में किसानों का हिमायती बनने के लिए अकाली दल और कांग्रेस में रस्साकशी चल रही है।

2. किसान आंदोलन में कांग्रेस ने लीड ली, इसलिए सम्मान वापसी का कदम

पंजाब की कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विधानसभा में केंद्र के कानून के खिलाफ प्रस्ताव पास कर किसानों का सपोर्ट किया। करीब दो महीने से पंजाब में किसान आंदोलन चलता रहा। राज्य में आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखने में कैप्टन कामयाब रहे। किसानों की दिल्ली कूच के दौरान पंजाब में कहीं रोक-टोक नहीं हुई। जब हरियाणा में किसानों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया तो कैप्टन ने आक्रामक रुख दिखाया। केंद्र सरकार से वार्ता में भी कैप्टन लीड करते नजर आ रहे हैं।

किसान आंदोलन के दौर में SAD की चर्चा, उसका नाम ज्यादा नहीं उभरा। अब प्रकाश सिंह बादल ने सम्मान वापसी का दांव चला है ताकि पार्टी का नाम चर्चा में रहे। साथ ही किसानों को भी मैसेज जाए कि SAD उनके फेवर में है।

3. भाजपा से 22 साल का रिश्ता तोड़ने पर भी नहीं हो रहा था सियासी फायदा

अकाली दल ने कृषि कानून को लेकर केंद्र सरकार में मंत्री पद छोड़ दिया। भाजपा से 22 साल पुरानी दोस्ती भी छोड़ दी। लेकिन, मौजूदा किसान आंदोलन में वह इन सबका पॉलिटिकल माइलेज नहीं ले पा रही थी। किसान आंदोलन से जुड़ी सुर्खियों में अमरिंदर ही नजर आ रहे थे। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, मौजूदा हालात को देखते हुए अकाली दल ने बड़ा दांव चलने का फैसला लिया और प्रकाश सिंह बादल ने पद्म विभूषण पुरस्कार लौटाने की घोषणा की।

4. केंद्र पर दबाव बनाने का क्रेडिट SAD को दिलाने की कोशिश
प्रकाश सिंह बादल के केंद्र सरकार में भाजपा के कद्दावर नेताओं से उनके अच्छे रिश्ते रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें भारत का नेल्सन मंडेला तक कह चुके हैं, क्योंकि बादल ने आजाद हिंदुस्तान में संघर्ष करते हुए करीब 2 दशक तक जेल काटी। ऐसे में केंद्र सरकार पर दबाव बनाने का क्रेडिट लेने के लिए सम्मान वापसी को अकाली दल का यह बड़ा दांव माना जा रहा है।

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Parkash Singh Badal Padma Vibhushan Award Update | Former Punjab CM Parkash Singh Badal returns Padma Vibhushan Over Farmer Protest

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