सीरम का दावा- कोवीशील्ड सेफ और इम्युनोजेनिक; देश में 30 करोड़ लोगों को जुलाई-अगस्त तक वैक्सीनेट करने की तैयारी


भारत में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका के वैक्सीन- कोवीशील्ड का ट्रायल कर रहे सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने चेन्नई की घटना पर सफाई दी है। SII ने कहा है कि उसकी वैक्सीन सेफ और इम्युनोजेनिक है। SII की यह सफाई इसलिए आई, क्योंकि चेन्नई में ट्रायल्स में शामिल हुए एक वॉलेंटियर ने न्यूरोलॉजिकल समस्याएं होने की बात कही थी। उसने कंपनी को कानूनी नोटिस भी भेजा है।

उधर, केंद्र सरकार ने अगले साल जुलाई-अगस्त तक 30 करोड़ लोगों को कोरोना वैक्सीन लगाने का प्लान बनाया है। वहीं, केरल सरकार ने अपने स्तर पर वैक्सीन बनाने के लिए हाई-लेवल कमेटी बनाई है। अमेरिका में भी वैक्सीन को लेकर महत्वपूर्ण डेवलपमेंट्स हुए हैं। फाइजर के बाद मॉडर्ना ने भी इमरजेंसी अप्रूवल के लिए अप्लाई कर दिया है।

चेन्नई की घटना पर सीरम की सफाई

सीरम इंस्टीट्यूट ने सोशल मीडिया पर दी सफाई में कहा-

  • कोवीशील्ड पूरी तरह से सेफ और इम्युनोजेनिक है। चेन्नई में वॉलेंटियर के साथ जो हुआ, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। पर जो भी उसे हुआ उसका वैक्सीन से कोई लेना-देना नहीं है। हम यह साफ करना चाहते हैं कि हमने सभी रेगुलेटरी और एथिकल प्रोसेसेज और गाइडलाइंस का सख्ती से पालन किया है। इस मामले की जानकारी संबंधित अथॉरिटी, प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर, DSMB और एथिक्स कमेटी को दे दी गई है। इस घटना से जुड़ा डेटा DCGI के साथ शेयर किया गया है।
  • हम सभी को आश्वस्त करना चाहते हैं कि जब तक वैक्सीन इम्युनोजेनिक और सेफ साबित नहीं हो जाती, तब तक इसे लोगों को उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। वैक्सीनेशन और इम्युनाइजेशन के बारे में कई गलतफहमियां हैं और उन्हें ध्यान में रखते हुए और कंपनी की इमेज को देखते हुए आरोप लगाने वाले वॉलेंटियर को कानूनी नोटिस भेजा गया है।

Addressing concerns related to the serious adverse event reported by a volunteer in Chennai, Serum Institute of India…

Posted by Serum Institute Of India on Monday, 30 November 2020

भारत में अगले साल शुरू होगा वैक्सीनेशन

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन ने कहा है कि अगले साल के शुरुआती 3-4 महीनों में हम लोगों को वैक्सीन मुहैया कराने की स्थिति में होंगे। जुलाई-अगस्त 2021 तक हमने 25-30 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाने की योजना बनाई है और उसी को ध्यान में रखकर तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक वैक्सीन नहीं मिल जातीं, तब तक मास्क ही वैक्सीन है। मास्क लगाना और सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखना बेहद अहम होगा।

राज्यों को निर्देश- कोविन ऐप पर हेल्थ वर्कर्स का डेटा अपलोड करें

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को कोविड-19 वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क (COVIN) पर हेल्थकेयर वर्कर्स के डेटा को अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। इन हेल्थ वर्कर्स को प्रायरिटी बेसिस पर कोरोना वैक्सीन लगाने की योजना है। कोविन ऐप को केंद्र सरकार ने डेवलप किया है और यह वैक्सीन रोलआउट प्लान में अहम भूमिका निभाने वाला है। वैक्सीन की खरीद, डिस्ट्रीब्यूशन, सर्कुलेशन, स्टोरेज और डोज शेड्यूल की डिटेल कोविन ऐप पर रहेगी। केंद्र सरकार की योजना के मुताबिक MBBS डॉक्टरों, BDS डॉक्टरों, स्टाफ नर्स (B.Sc नर्सिंग), सहायक नर्स (GNM, ANM आदि), फार्मासिस्ट, MBBS इंटर्न और BDS इंटर्न को वैक्सीन लगाने की ट्रेनिंग दी जाएगी।

कोलकाता में 2 दिसंबर से कोवैक्सिन का ट्रायल; मंत्री को लगेगा पहला शॉट

भारत की पहली स्वदेशी कोरोना वैक्सीन- कोवैक्सिन के फेज-3 के ट्रायल्स 2 दिसंबर को कोलकाता के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ कॉलरा एंड एंटरिक डिसीज (NICED) में शुरू होंगे। राज्य के शहरी विकास मंत्री फिरहाद हाकिम (62) पहले वॉलेंटियर के तौर पर वैक्सीन लगवा सकते हैं। इससे पहले उनका मेडिकल टेस्ट किया जाएगा और उस आधार पर ही उन्हें वैक्सीनेट किया जाएगा। हाकिम कोलकाता मेट्रोपॉलिटन कॉर्पोरेशन के चीफ भी हैं और उन्होंने सबसे पहले वैक्सीन लगवाने की इच्छा जताई है। कोवैक्सिन को हैदराबाद की कंपनी भारत बायोटेक ने ICMR के साथ मिलकर विकसित किया है। कोलकाता में 1,000 वॉलेंटियर्स को वैक्सीन लगाया जाएगा। चार हफ्ते के अंतर से दो डोज लगाए जाएंगे।

टी. जैकब जॉन के नेतृत्व में केरल में समिति बनाई

केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन ने सोमवार को वायरलॉजिस्ट टी. जैकब जॉन के नेतृत्व में एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है। यह कमेटी राज्य में वैक्सीन मैन्युफैक्चरिंग की संभावनाएं टटोलेगी। वेटरन वायलॉजिस्ट जॉन वायरलॉजी इंस्टिट्यूट स्थापित करने में केरल की सरकारों से जुड़े रहे हैं और वह देखेंगे कि क्या यह इंस्टिट्यूट मैन्युफैक्चरिंग भी कर सकता है।

फाइजर के बाद मॉडर्ना ने भी मांगा इमरजेंसी अप्रूवल

अमेरिकी कंपनी फाइजर के बाद मॉडर्ना ने भी अमेरिका और यूरोप में अपने कोविड-19 वैक्सीन के लिए इमरजेंसी अप्रूवल मांगा है। कंपनी ने कहा कि फेज-3 ट्रायल्स में उसका वैक्सीन 94.1% इफेक्टिव रहा है। सेफ्टी को लेकर कोई भी गंभीर मुद्दा इस दौरान सामने नहीं आया। मॉडर्ना ने यह भी कहा है कि वैक्सीन का एफिकेसी रेट उम्र, नस्ल, एथनिसिटी और लैंगिक आधार पर सभी के लिए सुरक्षित रहा है। इसका कोविड-19 के खिलाफ गंभीर केस को बचाने में 100% सक्सेस रेट रहा है। कंपनी के चीफ एक्जीक्यूटिव स्टीफन बैंसेल ने एक इंटरव्यू में बताया कि अगर वैक्सीन के लिए मंजूरी मिल जाती है और सब कुछ ठीक रहा तो इसका पहला डोज 21 दिसंबर तक दिया जा सकता है।

ब्रिटेन में ब्रिस्टल फुटबॉल स्टेडियम बनेगा वैक्सीनेशन सेंटर

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा है कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी/एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन कुछ ही हफ्तों में तैयार हो जाएगी। इसके बाद मिलिट्री ने ब्रिस्टल फुटबॉल स्टेडियम को वैक्सीनेशन सेंटर बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। जैसे ही वैक्सीन अप्रूव हो जाएगी, स्टेडियम का इस्तेमाल किया जाएगा। यहां एक लाख लोगों को वैक्सीनेट करने की योजना है। जॉनसन ने सोमवार को रेक्सहैम में वैक्सीन की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का दौरा किया। यहां पर अगले 12 महीनों में 35 करोड़ डोज बनाए जाने हैं। भारतीय कंपनी सीपी फार्मास्युटिकल्स की वोकहार्ट फैक्ट्री का भी जॉनसन ने टूर किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कुछ ही हफ्तों में वैक्सीन मिल जाएगा।

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