मोदी बोले- कोरोना ने बहुत कुछ बदला; लेकिन काशी की ऊर्जा, भक्ति, शक्ति को कोई नहीं बदल सकता


कार्तिक पूर्णिमा पर प्रधानमंत्री मोदी सोमवार दोपहर वाराणसी पहुंचे हैं। यहां 6 लेन हाईवे का लोकार्पण करने के बाद उन्होंने खजुरी में जनसभा की। इसके बाद मोदी बाबा विश्वनाथ के मंदिर पहुंचे। उन्होंने यहां बाबा विश्वनाथ का अभिषेक किया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी वाराणसी दौरे पर उनके साथ हैं। क्रूज से मोदी राजघाट पहुंचे और दीप जलाया। इसी के साथ काशी के 84 घाटों पर 15 लाख दीये रोशन किए गए।

वाराणसी के राजघाट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हर-हर महादेव! काशी कोतवाल की जय, माता अन्नपूर्णा की जय, मां गंगा की जय। जो बोले सो निहाल, सतश्री अकाल। सभी काशीवासियों को, देशवासियों को कार्तिक पूर्णिमा देव दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं। सभी को गुरुनानक देवजी के प्रकाश पर्व की भी बधाई।’’

मोदी ने भोजपुरी में संबोधन की शुरुआत की

मोदी ने कहा- नारायण का विशेष महीना यानी पुण्य कार्तिक मास के पुनमासी कहलन। इस पुनमासी पर गंगा में डुबकी लगावे, दान-पुन्य का महत्व रहल है। बरसों से दशाश्वमेघ, शीतला घाट या अस्सी पर सब डुबकी लगावत आवत रहल। पंडित राम किंकर महाराज पूरे कार्तिक महीना बाबा विश्वनाथ के राम कथा सुनावत रहलन। देश के हर कोने से लोग उनके कथा सुने आवे। कोरोना काल ने भले ही काफी कुछ बदल दिया है, लेकिन काशी की ऊर्जा, भक्ति, शक्ति उसको कोई थोड़े ही बदल सकता है।

काशी की गलियां ऊर्जा से भरी हैं: मोदी

मोदी ने कहा- सुबह से ही काशीवासी स्नान, ध्यान और दान में ही लगे हैं। काशी वैसे ही जीवंत है, काशी की गलियां वैसी ही ऊर्जा से भरी हैं, काशी के घाट वैसे ही दैदीप्यमान हैं। यही तो मेरी अविनाशी काशी है। काशी मां गंगा के सानिध्य में प्रकाश का उत्सव मना रही है। विश्वनाथ की कृपा से मुझे प्रकाश गंगा में डुबकी लगाने का अवसर मिल रहा है।

यहां आने से पहले काशी विश्वानाथ कॉरिडोर जाने का मौका भी मिला, रात में सारनाथ में लेजर शो का भी मौका मिलेगा। मैं इसे महादेव का आशीर्वाद और काशीवासियों का विशेष स्नेह मानता हूं। काशी के लिए एक और भी विशेष अवसर है। आपने सुना होगा, कल मन की बात में भी मैंने इसका जिक्र किया था और योगीजी ने भी उस बात को दोहराया।

माता अन्नपूर्णा की वापसी की खुशी मना रही काशी

मोदी ने कहा- 100 साल से भी पहले माता अन्नपूर्णा की जो मूर्ति काशी से चोरी हो गई थी, वो फिर वापस आ रही है। माता अन्नपूर्णा फिर एकबार अपने घर लौटकर आ रही हैं। काशी के लिए ये बड़े सौभाग्य की बात है। हमारे देवी-देवताओं की प्राचीन मूर्तियां आस्था के प्रतीक के साथ ही अमूल्य विरासत भी हैं। इतना प्रयास अगर पहले किया गया होता तो ऐसी कितनी ही मूर्तियां देश को काफी पहले वापस मिल जातीं, लेकिन कुछ लोगों की सोच अलग रही है।

हमारे लिए विरासत का मतलब देश की धरोहर है। कुछ लोगों के लिए विरासत का मतलब अपना परिवार, अपने परिवार का नाम होता है। हमारे लिए विरासत का मतलब हमारी संस्कृति, आस्था है। उनके लिए विरासत का मतलब अपनी प्रतिमाएं और अपने परिवार की तस्वीरें हैं। उनका ध्यान परिवार की विरासत को बचाने में रहा। हमारा ध्यान देश की विरासत बचाने और उसे संरक्षित करने पर है।

विश्वनाथ मंदिर पर पूजा के बाद अलकनंदा क्रूज पर नरेंद्र मोदी।

मोदी ने पूछा- मैं सही रास्ते पर हूं न?

मोदी ने लोगों से पूछा, “मैं सही रास्ते पर हूं ना, सही कर रहा हूं ना? आपके आशीर्वाद से ही सब हो रहा है। काशी की विरासत लौट रही है तो ऐसा लग रहा है जैसे काशी अन्नपूर्णा के आगमन की खबर सुनकर सजीसंवरी हो। लाखों दीपों से काशी का जगमग होना अद्भुत है। गंगा की लहरों में ये प्रकाश इसे और भी अलौकिक बना रहा है। ऐसा लग रहा है, जैसे पूर्णिमा पर देश दीपावली मना रही काशी, महादेव के माथे पर विराजमान चंद्रमा की तरह चमक रही है। काशी की महिमा ही ऐसी है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि काश्या ही काशते काशी, सर्व प्रकाशित:। काशी आत्मज्ञान से प्रकाशित होती है इसलिए वो विश्व को प्रकाश देने वाली, पथ प्रदर्शन करने वाली है।

हर युग में काशी के प्रकाश से किसी ना किसी महापुरुष की तपस्या जुड़ जाती है। आज हम जिस देव दीपावली के दर्शन कर रहे हैं। इसकी प्रेरणा पहले पंचगंगा घाट पर स्वयं आदि शंकराचार्यजी ने दी थी। बाद में अहिल्याबाई होल्कर जी ने इस आगे बढ़ाया। घाट पर अहिल्याबाई द्वारा स्थापित एक हजार दीपों का प्रकाश स्तंभ आज भी इस परंपरा का साक्षी है। कहते हैं कि जब त्रिपुरा सुर नामक दैत्य ने पूरे संसार को आतंकित कर दिया था, तब भगवान शिव ने कार्तिक पूर्णिमा के दिन उसका अंत किया था। आतंक, अत्याचार और अंधकार के उस अंत पर देवताओं ने महादेव की नगरी में आकर दीये जलाए थे। दीवाली मनाई थी। देवों की वो दीपावली ही देव दीपावली है।’

देश के लिए बलिदान देने वाले सपूतों को नमन

देव दीपावली पर मोदी ने कहा, “ये देवता कौन हैं? ये देवता तो आज भी हैं, आज भी ये देवता बनारस मेें दीपावली मना रहे हैं। संतों ने लिखा है कि काशी के लोग ही देव स्वरूप हैं। काशी के नर-नारी तो देवी और शिव के ही रूप हैं। इन 84 घाटों पर इन लाखों दीपों को आज भी देवता ही प्रज्ज्वलित कर रहे हैं, देवता ही ये प्रकाश फैला रहे हैं। ये दीपक उनके लिए भी जल रहे हैं, जो देश और जन्मभूमि के लिए बलिदान हुए। ये पल भावुक कर जाता है।

देश की रक्षा में अपनी शहादत देने वाले, अपनी जवानी खपाने वाले, अपने सपनों को मां भारती के चरणों में बिखेरने वाले हमारे सपूतों को नमन करता हूं। साथियों चाहे सीमा पर घुसपैठ की कोशिशें हों, विस्तारवादी ताकतों का दुस्साहस हो, या देश के भीतर देश को तोड़ने वाली साजिशें हों, भारत आज सबका जवाब दे रहा है और मुंहतोड़ जवाब दे रहा है। इसके साथ ही देश अब गरीबी, अन्याय और भेदभाव के अंधकार के खिलाफ भी बदलाव के दीये जला रहा है।’

वोकल फॉर लोकल के नारे लगवाए

देश आज लोकल के लिए वोकल हो रहा है। याद रखते हैं कि भूल जाते हैं, मेरे जाने के बाद। मैं बोलूंगा वोकल फॉर, आप बोलिएगा लोकल। इस बार की दीवाली जैसे मनाई गई, जैसे देश के लोगों ने लोकल प्रोडक्ट, लोकल गिफ्ट के साथ अपने त्योहार मनाए, वो वाकई प्रेरणादाई है। ये केवल त्योहार नहीं, हमारी जिंदगी का हिस्सा बनना चाहिए। प्रयासों के साथ हमारे पर्व भी एक बार फिर से गरीब की सेवा का माध्यम बन रहे हैं।

काशी का गुरुनानकदेव जी का करीबी रिश्ता

गुरुनानक देव ने अपना पूरा जीवन ही गरीब, शोषित, वंचित की सेवा में समर्पित किया था। काशी का गुरुनानक देव से आत्मीय संबंध भी रहा है। उन्होंने लंबा समय काशी में व्यतीत किया था। काशी का गुरुद्वारा उस दौर का साक्षी है, जब गुरु नानक जी पधारे थे और नई राह दिखाई थी। आज हम रिफॉर्म्स की बात करते हैं, लेकिन समाज और व्यवस्था में रिफॉर्म के बहुत बड़े प्रतीक तो गुरुनानक थे। जब समाज हित, राष्ट्र हित में बदलाव होते हैं तो जाने-अनजाने विरोध के स्वर जरूर उठते हैं। जब उन सुधारों की सार्थकता सामने आने लगती है तो सब ठीक हो जाता है। यही सीख हमें गुरुनानक जी के जीवन से मिलती है।

काशी के लिए जब विकास के काम शुरू हुए थे तो विरोध करने वालों ने तब भी विरोध किया था। आपको याद होगा कि जब काशी ने तय किया था कि बाबा के दरबार बनेगा, कॉरिडोर बनेगा। आज बाबा की गुफा से काशी का गौरव जीवित हो रहा है।

भोले का धाम, राम का नाम

मोदी ने कहा- नेक नीयत से जब काम किए जाते हैं तो विरोध के बावजूद उनकी सिद्धि होती है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर से बड़ा इसका और उदाहरण क्या होगा। बरसों से इस काम को लटकाने-भटकाने का काम हुआ, डर फैलाने का काम किया गया। जब रामजी ने चाह लिया तो मंदिर बन रहा है। साथियों अयोध्या, काशी और प्रयाग का ये क्षेत्र आज आध्यात्मिकता के साथ पर्यटन की अपार संभावनाओं के लिए तैयार हो रहा है।

देव दीपावली पर यही संदेश है कि सबमें सकारात्मकता का भाव हो। समूची दुनिया करुणा-दया के भाव को स्वयं में समाहित करे। विश्वास है कि ये संदेश, प्रकाश की ऊर्जा पूरे देश के संकल्पों को सिद्ध करेगी। देश ने आत्मनिर्भर भारत की जो यात्रा शुरू की है, उसे हम पूरा करेंगे।

काशी नहीं पहुंच पाया, तो लगा जैसे कुछ खो दिया

मोदी ने कहा- मैं पहले तो बार-बार आपके बीच आता था, लेकिन कोरोना के कारण इस बार विलंब हो गया। जब इतना समय मिला बीच में तो मुझे लगता था कि कुछ खो दिया। आज जब आया तो आपके दर्शन से मन ऊर्जावान हो गया। मैं इस कोरोना के कालखंड में भी एक दिन भी आपसे दूर नहीं था। केस, अस्पताल की व्यवस्था, गरीब भूखा तो नहीं है। हर बात में मैं सीधा जुड़ा रहता था। आपके सेवाभाव से किए गए काम, आपने किसी को भूखा नहीं रहने दिया, दवा बिना नहीं रहने दिया, ये पूरी दुनिया में हुआ है, मेरी काशी में हुआ है। आपके सेवाभाव, समर्पण के लिए गंगा के तट से सभी काशी वासियों को प्रणाम करता हूं। आपने गरीब से गरीब की जो चिंता की है, उसने मेरे दिल को छू लिया है। मैं जितना आपकी सेवा करूं, वो कम है।

मैं भरोसा दिलाता हूं मेरी तरफ से आपकी सेवा में कोई कमी नहीं रहने दूंगा। मेरे लिए गौरव का पर्व है कि आज मुझे ऐसे जगमगाते माहौल में आपके बीच आने का अवसर मिला है। कोरोना को परास्त करके हम विकास के पथ पर तेज गति से बढ़ेंगे। मां गंगा की धारा जैसे रुकावटों और संकटों के बावजूद सदियों से बह रही है। यही विश्वास लेकर मैं दिल्ली जाऊंगा। जय काशी, जय काशी, जय काशी, जय मां भारती।

क्रूज की सवारी कर विश्वनाथ मंदिर पहुंचे मोदी

बाबा विश्वनाथ के मंदिर पहुंचने के लिए मोदी ने क्रूज की सवारी की। भगवान अवधूत राम घाट से मोदी और योगी अलकनंदा क्रूज से ललिता घाट पहुंचे थे। इसके बाद उन्होंने विश्वनाथ कॉरिडोर के विकास कार्यों का जायजा लिया।

वाराणसी में प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वनाथ कॉरीडोर में जारी निर्माण कार्यों का जायजा लिया।

शाम को सारनाथ जाएंगे मोदी

वाराणसी दौरे के आखिर में मोदी भगवान बुद्ध की तपोस्थली सारनाथ के लिए रवाना होंगे। यहां वे लाइट एंड साउंड शो देखेंगे और इसके बाद बाबतपुर एयरपोर्ट से दिल्ली वापस लौट जाएंगे। PM मोदी करीब सात घंटे काशी में रहेंगे।

काशी में PM का 23वां दौरा

बतौर PM संसदीय क्षेत्र में उनका यह 23वां दौरा है, जबकि दूसरे कार्यकाल में वे तीसरी बार यहां पहुंचे। आखिरी बार वे 16 फरवरी को काशी आए थे। PM मोदी पहली बार देव दीपावली (कार्तिक पूर्णिमा) पर आ रहे हैं। वहीं, पहली बार वे गंगा मार्ग से काशी विश्वनाथ मंदिर जाएंगे। विश्वनाथ कॉरिडोर के विकास कार्यों को जायजा लेते हुए वे बाबा विश्वनाथ धाम पहुंचेंगे और वहां पूजा-अर्चना करेंगे।

वाराणसी में गंगा नदी में फाउंटेन लगाया गया है।

काशी के 16 घाटों पर बनाईं कलाकृतियां
इस दौरान 16 घाटों पर उनसे जुड़ी कथा की बालू से कलाकृतियां बनाई गई हैं। जैन घाट के सामने भगवान जैन की आकृति, तुलसी घाट के सामने विश्व प्रसिद्ध नाग नथैया के कालिया नाग की आकृति और ललिता घाट के सामने मां अन्नपूर्णा देवी की आकृति भी बनाई गई है। देव दीपावली पर प्रधानमंत्री ने खुद भी दीपदान किया। दशाश्वमेध घाट पर महाआरती के दौरान 21 बटुक और 42 कन्याएं आरती में शामिल हुईं। सुरक्षा के लिहाज से एक दिसंबर तक काशी में ड्रोन उड़ाने पर प्रतिबंध लगाया गया था।

काशी के घाट पर बालू से बनी कलाकृतियों को निहारते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

पिछली बार से डेढ़ गुना ज्यादा दीप जले
देव दीपावली पर काशी के सभी 84 घाट दीपकों से रोशन होते हैं। हर साल लाखों लोग इस अद्भुत नजारे को देखने के लिए पहुंचते हैं। लेकिन कोरोना संकट के चलते इस बार श्रद्धालुओं की संख्या सीमित कर दी गई है। हर एक शख्स के लिए मास्क अनिवार्य है। पिछले साल यहां 10 लाख दीये जलाए गए थे। लेकिन इस बार दीपों की संख्या में 5 लाख की बढ़ोत्तरी कर दी गई है। 20-25 घाटों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित हुए।

देव दीपावली की चल रही तैयारी।

देव दीपावली की अहमियत

मान्यता है कि देव दीपावली के दिन सभी देवता बनारस के घाटों पर आते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नाम के राक्षस का वध किया था। त्रिपुरासुर के वध के बाद सभी देवी-देवताओं ने मिलकर खुशी मनाई थी। काशी में देव दीपावली का अद्भुत संयोग माना जाता है। इस दिन दीपदान करने का पुण्य फलदायी और विशेष महत्व वाला होता है। मान्‍यता है कि भगवान भोलेनाथ ने खुद धरती पर आकर तीन लोक से न्यारी काशी में देवताओं के साथ गंगा घाट पर दिवाली मनाई थी। इसलिए इस देव दीपावली का धार्मिक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी है।

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वाराणसी में बाबा विश्वनाथ की पूजा-अर्चना करते हुए प्रधानमंत्री मोदी।

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