ट्रायल के पहले दिन कोवैक्सीन लगवाने वालों में 60% सीनियर सिटीजन; भोपाल के कारोबारी दंपति को भी दिया डोज


भोपाल में कोरोना के टीके कोवैक्सीन का ट्रायल पीपुल्स मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को शुरू हो गया। पहले दिन वैक्सीन लगवाने के लिए उनकी सहमति से 18 लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराए। इनमें से केवल 7 लोगों को ही वैक्सीन का डोज दिया जा सका।

अब बाकी लोगों को अगले दिन वैक्सीन दी जाएगी। इसमें सबसे ज्यादा संख्या बुजुर्गों की है। वैक्सीन लगवाने वालों में डॉक्टर, शिक्षक, किसान और कारोबारी और एक महिला शामिल हैं। इसमें रतुआ बनखेड़ी गांव के 4 बुजुर्ग किसान भी हैं। यानी 60% टीका एक ही गांव के लोगों के खाते में गया।

ट्रायल की प्रोसेस बुधवार से शुरू हो गई थी, उसके अगले दिन गुरुवार को पीपुल्स अस्पताल ने करीब 50 वॉलंटियर्स को टीका लगवाने के लिए तैयार किया था, लेकिन जब शुक्रवार को ट्रायल शुरू होने के पहले वॉलंटियर्स को फोन किया गया तो आधे से ज्यादा लोग टीका लगवाने के लिए तैयार नहीं हुए।

उन्होंने आगे देखने की बात कहकर मना कर दिया। इसके बाद रजिस्ट्रेशन कराने तक संख्या और कम हो गई। आखिरकार 18 लोगों ने ही नाम रजिस्टर्ड कराया। शाम को छह बजे तक केवल 7 लोगों को ही कोवैक्सीन का पहला डोज दिया जा सका।

कोवैक्सन का वैक्सीनेशन रूम, जहां पर टीका लगाया जा रहा है।

इसमें पीपुल्स मेडिकल कॉलेज के दो प्रोफेसरों ने भी रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन उन्हें फिलहाल टीका नहीं लगवाया गया। टीका लगवाने के लिए बागसेवनिया, कल्पना नगर, भवानी नगर, चूना भट्टी, होशंगाबाद रोड, सबरी नगर, भानपुर से वॉलंटियर्स ने रजिस्ट्रेशन कराया।

शबरी नगर भानपुर निवासी टीचर ने भास्कर को बताया कि मैंने भास्कर में वैक्सीन के ट्रायल की खबर पढ़ी थी, यहीं से मैंने तय किया कि मैं भी टीका लगवाऊंगा। जब उनसे पूछा गया कि टीका लगवाने से पहले डर नहीं लगा। उन्होंने कहा कि बिलकुल नहीं लगा। यहां के डॉक्टरों और काउंसलर ने मेरा काफी हौसला बढ़ाया, जिससे मेरे अंदर का डर खत्म हो गया।

शहर से आए कारोबारी दंपति ने भी वॉलंटियर्स बनकर वैक्सीन लगवाने पहुंचे। पहले दिन यही एकमात्र जोड़ा था, जो खुद से टीका लगवाने पहुंचा था। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि हमारे टीका लगवाने से और लोगों को प्रेरणा मिलेगी। इनकी पत्नी एकमात्र महिला थीं, जिन्हें पहले दिन टीका लगा है।

तीन महीने तक हर रोज डायरी में लिखेंगे रूटीन

पीपुल्स में हो रहे वैक्सीन ट्रायल के प्रिंसिपल इन्वेस्टीगेटर डॉ. राघवेंद्र गुमास्ता ने बताया कि जिन वॉलंटियर्स को टीके का डोज दिया जा रहा है। उनकी हम एक साल तक निगरानी करेंगे। इसमें प्रोसेस ये होगी कि तीन महीने के लिए एक नोटबुक वॉलंटियर्स को दी गई है, जिसमें वह हर रोज अपना रूटीन लिखेंगे। इसके आधार पर वैक्सीन के असर का एनालिसिस किया जाएगा।

कोवैक्सीन का टीका लगवाने से पहले रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है।

एक गांव से आए पांच किसान, जिनमें चार को लगा टीका

रतुआ बनखेड़ी गांव के पांच बुजुर्ग किसान पहले दिन टीका लगवाने पहुंचे। इसमें एक को छोड़कर सभी चार बुजुर्गों को वैक्सीन लगाई गई। इसमें पहला डोज लगवाने वाले टीचर के अलावा कारोबारी पति-पत्नी और चार बुजुर्ग किसान शामिल हैं।

पीपुल्स मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अनिल दीक्षित ने बताया कि पहले दिन 7 लोगों को डोज लग सके हैं। पहला टीका 2.50 बजे लगा। इसके बाद से लगातार डोज दिए गए, लेकिन प्रोसेस लंबी होने और सहमति लेने के बाद ही टीके का डोज दिया जा रहा है। सहमति लेनी भी बेहद जरूरी है। अगर वॉलंटियर्स चाहें तो आखिरी मौके पर हमें मना कर सकते हैं।

ऐसी रही डोज देने की प्रोसेस

  • काउंसलिंग- रजिस्ट्रेशन कराने के बाद सबसे पहले वालंटियर्स की काउंसिलिंग होती है, इसमें दो काउंसलर को लगाया गया है। इस दौरान 18 पेज का कंसेंट लेटर भरवाया जाता है।
  • हेल्थ एसेसमेंट- यहां पर काउंसिलिंग के बाद वॉलंटियर्स के स्वास्थ्य का पूरा परीक्षण किया जाता है। साथ ही कोरोना टेस्ट भी करते हैं। यहां पर दो डॉक्टरों और दो नर्स की टीम है।
  • वैक्सीनेशन- दो प्रोसेस गुजरने के बाद आखिर में टीके का डोज लगाया जाता है। इसके लिए एक डॉक्टर और चार नर्सेस को लगाया गया है।

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राजधानी भोपाल के पीपुल्स मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार से कोरोना के टीके का ट्रायल शुरू हो गया। पहले वाॅलंटियर की काउंसिलिंग करती पीपुल्स काउंसलर्स की टीम।

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