रबर के ग्लव्स बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी के 2400 एम्पलाई संक्रमित, 28 प्लांट बंद करेगी


रबर के ग्लव्स बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी टॉप ग्लव ने अपनी आधी से ज्यादा फैक्ट्रियां बंद करने का फैसला लिया है। मलेशिया की इस कंपनी के 2400 से ज्यादा एम्पलाई कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। हालात पर काबू पाने के लिए कंपनी अपने 28 प्लांट बंद करेगी। यह साफ नहीं है कि फैक्ट्रियां कब से बंद की जाएंगी, लेकिन इन्हें कई चरणों में बंद किया जाएगा।

सोमवार को मलेशिया की हेल्थ मिनिस्ट्री ने उन इलाकों में कोरोना के मामलों में तेज बढ़ोतरी की जानकारी दी, जहां कंपनी की फैक्ट्रियां और डॉरमेट्री हैं। अधिकारियों ने बताया कि टॉप ग्लव के कुल 5800 एम्पलाई की जांच की गई। इनमें से 2453 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

ज्यादातर एम्पलाई नेपाल के रहने वाले
टॉप ग्लव की मलेशिया में 41 फैक्ट्रियां हैं। इनमें ज्यादातर नेपाल के कर्मचारी काम करते हैं और भीड़ वाली जगहों में रहते हैं। डायरेक्टर जनरल ऑफ हेल्थ नूर हिशाम अबदुल्ला ने न्यूज एजेंसी रायटर्स को बताया कि संक्रमित मिले सभी कर्मचारियों को हॉस्पिटल में एडमिट किया गया है। उनके संपर्क में आए लोगों को भी क्वारैंटाइन कर दिया गया है ताकि दूसरे कर्मचारियों में संक्रमण न फैले।

कंपनी ने इस साल रिकॉर्ड मुनाफा कमाया
टॉप ग्लव ने इस साल रिकॉर्ड मुनाफा कमाया है। कोरोना की शुरुआत के बाद से कंपनी के प्रोडक्ट की मांग काफी बढ़ गई थी। इस कंपनी में ज्यादातर कम तनख्वाह पर काम करने वाले प्रवासी मजदूर काम करते हैं। कंपनी पर उनके शोषण का भी आरोप है। जुलाई में अमेरिका ने इसी वजह से टॉप ग्लव की दो सहायक कंपनियों से ग्लव्स इम्पोर्ट करने पर रोक लगा दी थी।

WHO की जांच टीम जल्द चीन जाएगी

दुनियाभर में अब तक 5.94 करोड़ से ज्यादा लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें 4.11 करोड़ लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 14.01 लाख लोगों की जान जा चुकी है। अब 1.69 करोड़ मरीज ऐसे हैं जिनका इलाज चल रहा है, यानी एक्टिव केस। ये आंकड़े www.worldometers.info/coronavirus के मुताबिक हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन यानी WHO ने कई महीनों तक टालने के बाद आखिरकार विदेशी एक्सपर्ट्स की एक टीम चीन भेजने का फैसला किया। यह टीम वहां कोरोनावायरस के फैलने की जांच करेगी। अमेरिका में एक हफ्ते में मरने वालों की संख्या 10 हजार से ज्यादा हो गई है।

इन सवालों के जवाब तलाशेगी टीम

WHO ने सोमवार रात कहा कि उसने दुनिया के हेल्थ एक्सपर्ट्स और संक्रामक बीमारियों की विशेषज्ञों की एक टीम चीन भेजने का फैसला किया है। न्यूज एजेंसी AFPके मुताबिक, यह टीम इस बात का पता लगाएगी कि चीन में वायरस कैसे फैला और इसका मुख्य सोर्स क्या था। इस सवाल का जवाब भी खोजा जाएगा कि यह बीमारी किसी जानवर से इंसानों तक पहुंचीं या इसकी कोई और वजह है। संगठन के इमरजेंसी डायरेक्टर माइकल रायन ने कहा- हमें पूरी उम्मीद है कि चीन सरकार इस टीम को तमाम सुविधाएं मुहैया कराएगी। इस टीम में चीन के एक्सपर्ट्स भी मौजूद रहेंगे।

संगठन का यह फैसला कुछ हैरान जरूर करता है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति लंबे वक्त से चीन पर आरोप लगाते आए हैं कि कोरोनावायरस उसके लैब से फैला। डोनाल्ड ट्रम्प ने यहां तक कहा था कि वे वक्त आने पर अपने आरोप साबित कर देंगे। हालांकि, वे अब तक कोई सबूत दे नहीं सके हैं। संगठन ने कहा- दुनिया को यह जानना जरूरी है कि आखिर वायरस इतना खतरनाक कैसे हुआ।

अमेरिका में कोई राहत नहीं
‘द गार्डियन’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में पिछले हफ्ते करीब 10 हजार लोगों की मौत हो गई। संक्रमण से हुई मौतों की रफ्तार पर लगाम पाने में अमेरिकी सरकार अब तक नाकाम साबित हुई है। हर दिन यहां औसतन करीब डेढ़ लाख मामले सामने आ रहे हैं। अमेरिकी सरकार ने लोगों से अपील की थी कि वे थैंक्स गिविंग सप्ताह में ट्रैवलिंग से बचें।

लेकिन, सरकार की अपील का कतई असर होता नजर नहीं आता। CNN के मुताबिक, लाखों लोग लॉन्ग ड्राइव पर जाने की तैयारी कर चुके हैं। इससे वायरस काफी तेजी से फैल सकता है। इसके अलावा एक और खतरा अस्पतालों में बेड कम पड़ने का है। यहां पहले ही हालात काबू से बाहर होते जा रहे हैं।

गरीब देशों को मदद मिलेगी
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक और अहम फैसला किया है। संगठन के मुताबिक, गरीब और मध्यम आय वाले देशों को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन इसके लागत मूल्य पर ही मिलेगी। हालांकि, अब तक यह साफ नहीं है कि ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का बाजार मूल्य क्या तय करते हैं। वैक्सीन का ट्रायल अंतिम दौर में है और माना जा रहा है कि मंजूरी के बाद यह जल्द ही बाजार में मौजूद होगी।

WHO ने कहा है कि वो ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका कंपनी का वैक्सीन गरीब देशों को लागत मूल्य पर उपलब्ध कराने की कोशिश कर रहा है। इस बारे में विस्तार से जानकारी गुरुवार को सामने आ सकती है।

फ्रांस में राहत
फ्रांस में संक्रमण की रफ्तार दो महीने में सबसे कम हुई है। यह दो हफ्ते पहले तक हर दिन करीब 25 हजार मामले सामने आ रहे थे। लेकिन, अब यह रफ्तार काफी हद तक काबू में आ गई है। सोमवार को यहां 4 हजार 452 मामले सामने आए। यह 28 सितंबर के बाद एक दिन में मिलने वाले मामलों की सबसे कम संख्या है। सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया- हमने सख्त उपाय किए और अब इसके बहुत अच्छे नतीजे सामने आ रहे हैं। यह बाकी देशों के लिए भी मैसेज है कि संक्रमण की रफ्तार कम की जा सकती है और अपने लोगों की जान बचाई जा सकती है।

कोरोना प्रभावित टॉप-10 देशों में हालात

देश

संक्रमित मौतें ठीक हुए
अमेरिका 12,770,848 263,639 7,541,874
भारत 9,177,641 134,251 8,603,463
ब्राजील 6,088,004 169,541 5,445,095
फ्रांस 2,144,660 49,232 152,592
रूस 2,114,502 36,540 1,611,445
स्पेन 1,606,905 43,131 उपलब्ध नहीं
यूके 1,527,495 55,230 उपलब्ध नहीं
इटली 1,431,795 50,4531 584,493
अर्जेंटीना 1,374,631 37,122 1,203,800
कोलंबिया 1,254,979 35,479 1,158,897

आंकड़े www.worldometers.info/coronavirus के मुताबिक हैं।

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