बिहार में सीएम पिछड़ा तो डिप्टी सीएम अगड़ा क्यों नहीं? तारकिशोर पर पार्टी राजी तो नंदकिशोर पर क्यों नहीं?


बिहार में सरकार तो बन गई, लेकिन सत्ता में काबिज दलों के अंदर स्थितियां सहज होती नहीं दिख रहीं। भाजपा सबसे ज्यादा असहज स्थिति में है। यहां डिप्टी CM की कुर्सी को लेकर शुरू हुआ बवाल खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है।

बवंडर तीन सवालों पर है
1
. पिछड़ा वर्ग से ही डिप्टी सीएम देना था, तो तारकिशोर से बहुत सीनियर नंदकिशोर यादव के नाम पर विचार क्यों नहीं किया गया?
2. अति पिछड़ा वर्ग के नाम पर रेणु देवी को डिप्टी सीएम का पद देना था, तो काफी पहले से इस दौड़ में रहे डॉ. प्रेम कुमार के नाम फाइनल क्यों नहीं किया गया?
3. सीएम नीतीश कुमार पिछड़ा वर्ग से हैं, तो भाजपा मंगल पांडेय जैसे अगड़ी जाति से आने वाले किसी नेता को डिप्टी सीएम का पद क्यों नहीं दिया गया?

अन्य राज्यों की तरह बिहार में भाजपा के इस प्रयोग को पार्टी के नेता सीधे तौर पर नकार तो नहीं रहे, लेकिन अंदर ही अंदर जबरदस्त बवाल है। यही कारण है कि राजभवन तक मंत्रियों का नाम पहुंचाने में भाजपा को देर लगी।

प्रदेश अध्यक्ष और बिहार प्रभारी असहज हो गए
भाजपा में सीनियर-जूनियर के साथ जातिगत गणित की लड़ाई रविवार शाम से ही शुरू हो गई और रविवार को यह चरम पर नजर आई। प्रदेश भाजपा के बड़े नेताओं के अंदर चल रहे गतिरोध को लेकर प्रदेश अध्यक्ष डॉ. संजय जायसवाल और बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव असहज नजर आए। जदयू की ओर से जहां संभावित मंत्रियों को शपथ के लिए फोन जाने की औपचारिकता होती रही, वहीं भाजपा में यह काम बहुत देर तक टलता रहा।

शपथ के चार घंटे पहले डॉ. संजय जायसवाल एक सूची लेकर राजभवन पहुंचे। इस सूची में भाजपा के कई सीनियर मंत्रियों के नाम थे, लेकिन वे इस बात से असहज महसूस कर रहे हैं कि उनका नाम इंटर पास डिप्टी CM के नाम के बाद लिखा गया। रविवार को NDA की बैठक के दौरान तारकिशोर प्रसाद का नाम भास्कर सबसे पहले सामने लाया था। रेणु देवी का नाम रविवार शाम से सुर्खियों में आया। भाजपा ने इन दोनों में से किसी नाम की पुष्टि नहीं की थी। यह भी कयास लगाए जा रहे थे कि सीनियर मंत्रियों के गतिरोध को देखते हुए डिप्टी सीएम पद पर भाजपा बैकफुट पर आ सकती है।

मंगल पांडेय को लेकर कसमसाहट
भाजपा के प्रदेश मुख्यालय से राजभवन के लिए सूची निकलने के बाद बिहार भाजपा के चुनाव प्रभारी देवेंद्र फडणवीस के सामने इस बात को लेकर बवाल तो नहीं हुआ, लेकिन वरिष्ठ नेताओं के बीच यह चर्चा थमने का नाम नहीं ले रही थी कि नंदकिशोर को छोड़कर तारकिशोर का और प्रेम कुमार की जगह रेणु देवी का नाम क्यों फाइनल किया जा रहा है? नीतीश के मुख्यमंत्री और नित्यानंद के उप मुख्यमंत्री बनाने की चर्चा पर पार्टी के नेता असहज नहीं थे, लेकिन उनके मन में इस बात की कसक थी कि मंगल पांडेय का नाम दरकिनार क्यों किया गया।

नंद किशोर को स्पीकर पद से मैनेज करने की कोशिश
नीतीश कुमार की इच्छा के बावजूद सुशील कुमार मोदी को डिप्टी सीएम नहीं बनाया गया, तो विधानसभा अध्यक्ष पद जदयू के पास रहने की संभावना थी। विजय कुमार चौधरी का नाम भी तय था, लेकिन भाजपा ने जदयू से यह पद ही ले लिया। यह पद अगड़ी जाति के अमरेंद्र प्रताप सिंह को देने की बात थी, ताकि बड़े पदों पर तालमेल बना रहे, लेकिन अब प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और सीनियर मंत्री रहे नंद किशोर यादव को मैनेज करने में इस पद का इस्तेमाल हो सकता है।

सोमवार दोपहर बाद स्पीकर की जगह अमरेंद्र प्रताप को मंत्री पद देने के बावजूद भाजपा के अंदर का बवंडर नहीं थमा। मंत्रियों की सूची राजभवन पहुंचने के बाद नंदकिशोर यादव और डॉ. प्रेम कुमार के बीच स्पीकर पद पर फैसला होना है। दोनों ही नेता कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।

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