सिर्फ भास्कर का एग्जिट पोल ही सच की तरफ, NDA 131 और महागठबंधन 95


मंगलवार सुबह जब रुझान आना शुरू हुए तो बिहार की चेयर रेस और दिलचस्प हो गई। शुरुआत से ही महागठबंधन आगे बना हुआ था। सुबह 9 बजे तक वह इतनी बढ़त हासिल कर चुका था कि उसकी सरकार आसानी से बन जाए, लेकिन एक घंटे बाद तस्वीर बदल गई और नीतीश ने बाजी पलट दी। NDA 120 के करीब पहुंचता दिखा। अगले आधे घंटे में उसने रुझानों में बहुमत का आंकड़ा छू लिया। सिर्फ भास्कर का एग्जिट पोल सही साबित होता दिख रहा है, जिसमें हमने बताया था कि NDA को 120 से 127 सीटें मिल सकती हैं।

रुझानों से जुड़े अपडेट्स

  • सुबह 11 बजे NDA 130 और महागठबंधन 97 पर आ गया।
  • सुबह साढ़े दस बजे NDA 125 पर पहुंच गया और महागठबंधन 109 पर आ गया।
  • सुबह 10 बजे NDA बढ़कर 119 पर था और महागठबंधन घटकर 114 पर आ गया था।
  • सुबह 9 बजे महागठबंधन को 120 सीटें मिल चुकी थीं और NDA 90+ सीटों पर था।
  • सुबह साढ़े आठ बजे रुझानों में महागठबंधन 60+ और NDA 40+ पर था।

बड़े चेहरों से जुड़े अपडेट्स

  • लालू यादव के छोटे बेटे तेजस्वी राघोपुर से आगे हैं। बड़े बेटे तेजप्रताप हसनपुर सीट से बढ़त बनाए हुए थे, लेकिन 10 बजे बाद वे इस सीट से पिछड़ गए।
  • मधेपुरा से उम्मीदवार पप्पू यादव तीसरे नंबर पर चल रहे हैं।
  • बिहारीगंज सीट से शरद यादव की बेटी सुभाषिनी दूसरे नंबर पर चल रही हैं।
  • बांकीपुर से शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा आगे चल रहे हैं।
  • परसा से जदयू के चंद्रिका राय आगे और इमामगंज से हम प्रत्याशी जीतनराम मांझी पीछे चल रहे हैं।
  • VIP के मुकेश सहनी सिमरी बख्तियारपुर सीट पर आगे चल रहे हैं।
  • जमुई से भाजपा की श्रेयसी सिंह बढ़त बनाए हुए हैं।

काउंटिंग से जुड़े अपडेट्स

  • देरी से पहुंचा स्टाफ: सुबह 8 बजे से काउंटिंग शुरू होनी थी, लेकिन राजधानी पटना से आधा घंटा बीतने के बाद भी कोई अपडेट नहीं आ सका। स्टाफ काउंटिंग सेंटर पर देरी से पहुंचा। कई लोग मोबाइल लेकर आ गए थे। फिर नाश्ता करने में देरी हुई। सुबह 40 मिनट बीतने के बाद भी किसी प्रकार का रुझान नहीं दिया गया।
  • 55 काउंटिंग सेंटर: पूर्वी चंपारण, सीवान, बेगूसराय और गया में तीन-तीन, नालंदा, बांका, पूर्णिया, भागलपुर, दरभंगा, गोपालगंज, सहरसा में दो-दो काउंटिंग सेंटर बनाए गए। 55 काउंटिंग सेंटरों में 414 हॉल बनाए गए।

बयानों से जुड़े अपडेट्स

  • अगर जदयू हारेगी तो कोरोना की वजह से: जनता दल यूनाइटेड के नेता केसी त्यागी ने कहा कि एक साल पहले राजद को लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली। लोकसभा चुनाव के हिसाब से तो जदयू और सहयोगी दलों को 200 से ज्यादा सीटें मिलनी थीं। एक साल में ब्रांड नीतीश को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। हम अगर हार रहे हैं तो वह सिर्फ कोरोना की वजह से।

चुनाव प्रचार के 4 बड़े चेहरे

  • नीतीश कुमारः खुद चुनावी मैदान में तो नहीं थे, लेकिन जदयू का सबसे बड़ा चेहरा नीतीश ही थे। उन्होंने 103 इलाकों में 113 चुनावी रैलियां कीं।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीः मोदीकाल का ये पहला चुनाव था, जिसमें अमित शाह नदारद रहे। मोदी ही प्रचार का बड़ा चेहरा रहे। उन्होंने प्रचार के दौरान बिहार में 12 रैलियां कीं।
  • तेजस्वी यादवः महागठबंधन के सीएम उम्मीदवार भी हैं। तेजस्वी ने 21 दिन में 251 चुनावी सभाएं कीं। यानी, हर दिन औसतन 12 रैलियां। 4 रोड शो भी किए।
  • राहुल गांधीः कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी तबीयत खराब होने की वजह से प्रचार से दूर रहीं। राहुल की बहन और कांग्रेस महासचिव प्रियंका भी कहीं नहीं दिखाई दीं। कांग्रेस के लिए राहुल ने ही प्रचार का मोर्चा संभाला। उन्होंने कुल 8 रैलियां कीं।

2019 लोकसभा चुनाव में 223 विधानसभा सीटों पर आगे था एनडीए
2019 में हुए लोकसभा चुनाव में बिहार की 40 में 39 सीटें एनडीए को मिली थीं। सिर्फ एक सीट पर कांग्रेस का उम्मीदवार जीता था। लोकसभा के नतीजों को अगर विधानसभा क्षेत्र के हिसाब से देखें तो एनडीए को 223 सीटों पर बढ़त मिली थी। इनमें से 96 सीटों पर भाजपा तो 92 सीटों पर जदयू आगे थी। लोजपा 35 सीटों पर आगे थी।

एक सीट जीतने वाला महागठबंधन विधानसभा के लिहाज से 17 सीटों पर आगे था। इनमें 9 सीट पर राजद, 5 पर कांग्रेस, दो पर हम (सेक्युलर) जो अब एनडीए का हिस्सा है और एक सीट पर रालोसपा को बढ़त मिली थी। अन्य दलों में दो विधानसभा क्षेत्रों में AIMIM और एक पर CPI-ML आगे थी।

2015 में साथ लड़े थे राजद और जदयू
2015 के चुनाव में राजद, जदयू और कांग्रेस ने साथ मिलकर महागठबंधन बनाया था। इस गठबंधन को 178 सीटें मिलीं थी। लेकिन, डेढ़ साल बाद ही नीतीश महागठबंधन से अलग होकर एनडीए में चले गए। इस चुनाव में एनडीए में भाजपा, VIP और हम (सेक्युलर) के साथ जदयू भी है। वहीं, पिछले चुनाव में एनडीए का हिस्सा रही रालोसपा और लोजपा के साथ है।

मुख्यमंत्री पद के दावेदार

  • नीतीश कुमार: 2010 के चुनाव में नीतीश एनडीए की ओर से तो 2015 में महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद का चेहरा थे। इस बार फिर वो एनडीए की ओर से सीएम फेस हैं। पिछले 15 साल से राज्य में नीतीश की पार्टी सत्ता में है। इनमें 14 साल से ज्यादा नीतीश ही मुख्यमंत्री रहे हैं।
  • तेजस्वी यादव: महागठबंधन की ओर से इस बार तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री का चेहरा हैं। लालू यादव के जेल जाने के बाद महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी राजद का चेहरा तेजस्वी ही हैं। पूरा चुनाव महागठबंधन ने तेजस्वी के चेहरे पर ही लड़ा है। पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव प्रचार के पोस्टर तक से गायब थे।

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