आईआईटी में टॉप करने वाले पुणे के चिराग का मंगल ग्रह पर कॉलोनी बसाने का सपना; अमेरिका से इंजीनियरिंग कर रहे, लेकिन काम भारत में ही करेंगे


इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) दिल्ली ने JEE एडवांस 2020 परीक्षा के 7 दिन बाद रिजल्ट जारी कर दिया है। पुणे के रहने वाले 18 साल के चिराग फलोर ने AIR-1 हासिल की है। चिराग के 396 में से 352 मार्क्स आए हैं। इस सफलता के बाद उनके वड़गांव शेरी स्थित करण आशियाना सोसायटी वाले घर पर जश्न का माहौल है। कोरोना की वजह से लोग फोन और वीडियो कॉल के जरिए बधाइयां दे रहे हैं। टॉप करने के बावजूद चिराग देश के किसी भी इंस्टीट्यूट में दाखिला नहीं लेंगे। उनका सपना मंगल ग्रह पर कॉलोनी बसाने का है।

8 से 12 घंटे पढ़ाई करते थे
दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में चिराग ने बताया अच्छे रिजल्ट का यकीन था। लेकिन, टॉप करुंगा इसकी उम्मीद नहीं थी। चिराग अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, बहन, टीचर और आकाश इंस्टीट्यूट को देते हैं। उन्होंने बताया कि आईआईटी की तैयारी उन्होंने 9वीं क्लास से ही शुरू कर दी थी। वे हर दिन 8 से 12 घंटे पढ़ाई करते थे।

इसी साल 25 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिराग को सम्मानित किया था।

मोदी ने चिराग से कहा था- जो ठान लो, उसे पूरा करके ही छोड़ो
इसी साल जनवरी में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों बालशक्ति पुरस्कार से सम्मानित हो चुके चिराग फलोर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिल चुके हैं। उस वक्त चिराग ने कहा था,”प्रधानमंत्री से मिलना मेरे लिए गर्व की बात है। वे मेरे रोल मॉडल रहे हैं। जिस तरह का नजरिया उनका देश के लिए है, वैसा ही मैं भी सोचता हूं। मुलाकात के दौरान वे किसी को भी कंफर्टेबल कर देते हैं। उन्होंने कहा था- जीवन में जो ठान लो उसे पूरा करके ही छोड़ो और हमेशा माता-पिता का सम्मान करो।”

राष्ट्रपति से बालशक्ति पुरस्कार लेने के दौरान चिराग।

टॉप करने के बावजूद देश के किसी इंस्टीट्यूट में दाखिला नहीं लेंगे
आईआईटी में टॉप करने के बावजूद चिराग देश के किसी भी इंस्टीट्यूट में एडमिशन नहीं लेंगे। वे मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी, अमेरिका) से इंजीनियरिंग कर रहे हैं। एडमिशन होने के बावजूद कोरोना लॉकडाउन की वजह वे वहां नहीं जा सके हैं। फिलहाल वे ऑनलाइन क्लास जॉइन करते हैं। चिराग ने बताया, “शुरू से ही मेरा सपना एमआईटी जाने का था। लेकिन मैं क्लीयर कर दूं कि मैं सिर्फ पढ़ाई करने के लिए वहां गया हूं, उसके बाद लौट आऊंगा और अपने देश के लिए काम करूंगा।”

चिराग के घर जश्न का माहौल है। फोन पर लगातार बधाइयां मिल रही हैं।

भारतीयों के लिए मंगल ग्रह पर कॉलोनी बसाने का सपना
चिराग ने बताया कि पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका सपना मंगल ग्रह पर जाने का है। वे मंगल ग्रह पर भारतवासियों के लिए सैकेंड होम बनाना चाहते हैं। वे चाहते हैं कि जैसे हम देश में एक जगह से दूसरी जगह जा सकते हैं, वैसे ही लोग पृथ्वी से मंगल ग्रह तक जा सकें। चिराग ने कहा,”यह मुश्किल जरूर है, लेकिन असंभव नहीं। प्रधानमंत्री जी कहते हैं अगर आपने कोई लक्ष्य बना लिया तो उसका पीछा तब तक नहीं छोड़ो जब तक वह पूरा नहीं हो जाता। मुझे यकीन है कि एक दिन मुझे इसमें सफलता मिलेगी।”

2 साल तक मोबाइल फोन, टीवी और सोशल मीडिया से दूर रहे
अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए चिराग ने 2 साल तक न मोबाइल फोन इस्तेमाल किया और न ही टीवी देखा। लॉकडाउन की वजह से मजबूरी में उन्हें मार्च में स्मार्टफोन लेना पड़ा। हालांकि, एग्जाम से कुछ दिनों पहले उन्होंने फोन से भी दूरी बना ली थी।

चिराग (बाएं) अपने परिवार के साथ।

गोलगप्पे खाने के शौकीन
चिराग के पिता पवन कुमार फलोर भी एक बड़ी आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। उनकी मां पूजा देवी हाउसवाइफ हैं। चिराग अपनी बहन लावण्या के सबसे करीब हैं। चिराग को स्पेस के बारे में जानना और रात में तारों को निहारना अच्छा लगता है। मां के हाथ से बने गोलगप्पे बहुत पसंद हैं। सोमवार को भी उन्होंने गोलगप्पे खाकर ही सेलिब्रेट किया।

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चिराग मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी, अमेरिका) से इंजीनियरिंग कर रहे हैं।

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