अटल सरकार में विदेश, रक्षा और वित्त तीनों पोर्टफोलियो संभाले, 1999 में हाईजैक प्लेन छुड़ाने में अहम रोल निभाया था


अटल सरकार में मंत्री रहे जसवंत सिंह (82) का रविवार सुबह 6.55 बजे निधन हो गया। दिल्ली के आर्मी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। 25 जून को उन्हें दिल्ली के आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनका मल्टी ऑर्गन डिस्फंक्शन सिंड्रोम का इलाज चल रहा था यानी अंगों ने ठीक से काम करना बंद कर दिया था। राजनीति में आने से पहले जसवंत सेना में थे। वे मेजर के पद से रिटायर हुए थे।

मोदी ने दो ट्वीट किए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, ‘जसवंत सिंह जी ने हमारे देश की पूरी लगन से सेवा की। पहले सैनिक के रूप में, बाद में राजनीति से उनका लंबा जुड़ाव रहा। अटल जी की सरकार उन्होंने बेहद अहम पोर्टफोलियो संभाले। वित्त, रक्षा और विदेश मामलों में उन्होंने मजबूत छाप छोड़ी। उनके निधन से दुखी हूं।’

‘वे राजनीति और समाज को लेकर अपने अलग तरह के नजरिए के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। भाजपा को मजबूत करने में भी उनका खासा योगदान था। मैं उनके साथ हुई चर्चाओं को हमेशा याद रखूंगा। उनके परिवार और समर्थकों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त करता हूं।’

प्लेन हाईजैक होने के बाद आतंकियों को लेकर कंधार गए थे

24 दिसंबर 1999 को इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट नंबर IC-814 को हाईजैक करके अफगानिस्तान के कंधार ले जाया गया था। यात्रियों को बचाने के लिए भारत सरकार को तीन आतंकी छोड़ने पड़े थे। जिन आतंकियों को छोड़ा गया था, उनमें मुश्ताक अहमद जरगर, अहमद उमर सईद शेख और मौलाना मसूद अजहर शामिल था। इन आतंकियों को लेकर जसवंत ही कंधार गए थे। 1998 में परमाणु परीक्षण के बाद अमेरिका ने भारत पर सख्त प्रतिबंध लगाए थे। तब जसवंत ने ही अमेरिका से बातचीत की थी। 1999 में करगिल युद्ध के दौरान भी उनकी भूमिका अहम रही।

एक बार पार्टी ने निकाला, एक बार खुद पार्टी छोड़ी

2012 में भाजपा ने उन्हें उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया, लेकिन, यूपीए के हामिद अंसारी के हाथों हार का सामना करना पड़ा। अपनी किताब में जसवंत ने मुहम्मद अली जिन्ना की तारीफ की। भाजपा ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया। 2010 में उनकी वापसी हुई। 2014 में उन्हें भाजपा ने लोकसभा चुनाव का टिकट नहीं दिया। उनकी बाड़मेर सीट से भाजपा ने कर्नल सोनाराम चौधरी को उतारा। इसके बाद जसवंत ने भाजपा छोड़ दी। निर्दलीय चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। इसी साल उन्हें सिर में चोट लगी। इसके बाद से जसवंत कोमा में ही थे।

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Jaswant Singh, who was a minister in the Atal government, died at the age of 82, Modi said – he will be known for different kinds of politics

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